प्राकृतिक व जैविक खेती अपनाएं किसान : कुलपति डा. बृजेंद्र सिंह
करहां (मऊ) : रासायनिक खेती से जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है, वहीं प्राणी जगत एवं पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। आज वर्तमान समय की मांग है कि भारत के किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाएं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। साथ ही मनुष्य का स्वास्थ्य और प्रकृति की संरचना पर भी बेहतर प्रभाव देखने को मिलता है।
यह बातें कुमारगंज अयोध्या स्थित आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डाक्टर बृजेंद्र सिंह ने कही। वे मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के याकूबपुर गांव में आयोजित विकसित कृषि संकल्प अभियान कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने आगे बताया कि हमारे देश में दिन प्रतिदिन सिचाई व पीने के पानी की कमी होती जा रही है। प्राकृतिक व जैविक खेती में सिचाई रुपी जल की आवश्यकता कम पड़ती है। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इसलिए किसानों, उनकी मिट्टी और उनकी आमदनी बढ़ाने में जैविक व प्राकृतिक खेती एक सर्वश्रेष्ठ विकल्प साबित होगा। कहा कि आप सभी कृषि वैज्ञानिकों से नई तकनीकि व नई योजनाओं की जानकारी लेकर भारत को कृषि प्रधान देश बनाएं रख सकते हैं।
इसके पूर्व अरैला, भांटीकला व याकूबपुर में आए उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी मिथिलेश कुमार, एनबीएआईएम कुशमौर के कृषि वैज्ञानिक डा. अंजनी सिंह, अपर जिला कृषि अधिकारी सौरभ कुमार सिंह, पिलखी विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. वी.के. सिंह, डा. अंगद प्रसाद, डा. आकांक्षा सिंह व जितेंद्र कुशवाहा, जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता, सहायक खंड विकास अधिकारी कृषि संतोष कुमार मिश्रा, प्राविधिक सहायक विजय कुमार मौर्य, मृदा प्रशिक्षण प्रभारी राकेश बरनवाल, पशुधन प्रसार अधिकारी हर्ष प्रकाश शाही ने किसानों के शिविर को संबोधित किया। उपस्थित किसानों को अपने-अपने विभाग की नवीन योजनाओं से अवगत कराया एवं उनकी आय दुगुनी करने के उपाय सुझाये।
इस अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि संतोष सिंह मिंटू, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, नवमी प्रसाद, किसान जयजय सिंह, चंद्रकांत तिवारी, रितिक सिंह, जितेंद्र कश्यप, सुदर्शन सिंह, मोनू कुमार, नीरज कश्यप, सुधीर सिंह, मुन्ना मौर्य, राजू सरोज, पप्पू सरोज आदि उपस्थित रहे।


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