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शिव-पार्वती विवाह की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

शिव-पार्वती विवाह की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के स्वयंभू शिव मंदिर शमशाबाद में चल रही श्रावण मास पर्यंत श्रीराम कथा के सातवें दिन शुक्रवार को आचार्य जगदीश ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। महादेव के विवाह का प्रसंग सुन श्रोतागण भावविभोर नजर आए।

शिव पार्वती विवाह के बारे में कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि पुराणों में विष्णु-लक्ष्मी विवाह, गणेशजी का रिद्धि-सिद्धि विवाह, राम-सीता विवाह और रुक्मणी-कृष्ण विवाह के साथ ही शिव-पार्वती के विवाह की भी विशेष चर्चा है। इस विवाह की चर्चा हर पुराण में मिलेगी। भगवान शंकर ने सबसे पहले सती से विवाह किया था। यह विवाह बड़ी कठिन परिस्थितियों में हुआ था, क्योंकि सती के पिता दक्ष इस विवाह के पक्ष में नहीं थे। हालांकि उन्होंने अपने पिता ब्रह्मा के कहने पर सती का विवाह भगवान शंकर से कर दिया।

राजा दक्ष द्वारा शंकरजी का अपमान करने के चलते सती माता ने यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद शिवजी घोर तपस्या में चले गए। सती ने बाद में हिमवान के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। उस दौरान तारकासुर का आतंक था। उसका वध शिवजी का पुत्र ही कर सकता था ऐसा उसे वरदान था लेकिन शिवजी तो तपस्या में लीन थे। ऐसे में देवताओं ने शिवजी का विवाह पार्वतीजी से करने के लिए एक योजना बनाई। उसके तहत कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेजा गया। कामदेव ने तपस्या तो भंग कर दी लेकिन वे खुद भस्म हो गए। 

उन्होंने आगे बताया कि देवताओं के अनुरोध और माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर बाद में शिवजी ने पार्वतीजी से विवाह किया। इस विवाह में शिवजी बारात लेकर पार्वतीजी के यहां पहुंचे। कहते हैं कि शिवजी की बारात में हर तरह के लोग, गण, देवता, दानव, दैत्यादि कई थे। शिव पशुपति हैं, मतलब सभी जीवों के देवता भी हैं, तो सारे जानवर, कीड़े-मकोड़े और सारे जीव उनकी शादी में उपस्थित हुए। यहां तक कि भूत-पिशाच और विक्षिप्त लोग भी उनके विवाह में मेहमान बन कर पहुंचे। जबकि कन्या पक्ष से तमाम राजा-महाराजा, देव-ऋषिगण मौजूद रहे।

कथा के बाद भव्य आरती की गई। साथ ही पुण्य कथा प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान दयाशंकर सिंह, इंद्रदेव सिंह, हरिश्चन्द्र, रामनरायन गुप्ता, रामा सिंह, अखिलेश कुमार, श्यामविजय, कालिंदी देवी, हेमावती, खुशबू, दुखहरन, आरती शर्मा, रामकृत शर्मा, रुदल कुमार, रामदरश आदि मौजूद रहे।

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