जड़ भरत चरित्र व कृष्ण लीलाओं की कथा ने भक्तों को किया भावविभोर
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के बजरंग नगर हलीमाबाद व सद्धोपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथाओं में रविवार को जड़ भरत चरित्र, गोवर्धन लीला और कालिया नाग दमन के मार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। लोग देर तक कथा रस में गोते लगाते भावविभोर नजर आएं
बजरंग नगर हलीमाबाद में कथाव्यास डाक्टर राकेश शास्त्री ने जड़ भरत चरित्र का सार सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य मुक्ति है, और यह केवल भगवत कृपा से ही संभव है। उन्होंने बताया कि महाराज ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत वर्ष पड़ा। राजपाट छोड़ तपस्वी बने भरत मोहवश हिरण के शावक में आसक्त हो गए, जिसके कारण उन्हें अगले जन्म में हिरण योनि प्राप्त हुई। शास्त्रीजी ने कहा कि मोह और आसक्ति साधना के मार्ग की सबसे बड़ी बाधाएँ हैं, इसलिए भक्ति में एकनिष्ठता अनिवार्य है।
मुख्य यजमान राधेश्याम दूबे व संध्या दूबे ने विधिवत पूजन-अर्चन किया। इस दौरान भाजपा प्रदेश प्रवक्ता आनंद दूबे, हरिओम शरण महाराज, डाक्टर रविंद्र उपाध्याय, राजेंद्र चौहान, शशिकांत आतिशबाज, संजय उपाध्याय, लालचंद तिवारी, पवन सिंह, सुजय उपाध्याय, रानी राय, अलका, विभा, अंकिता, शिखा, सोनी सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
उधर सद्धोपुर स्थित शिव मंदिर के पास चल रही सप्तदिवसीय कथा में चौथे दिन कथावाचक रवि कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला और कालिया नाग दमन का अद्भुत वर्णन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जब देवराज इंद्र ने प्रलयंकारी वर्षा कर ब्रजवासियों को संकट में डाल दिया, तब बालकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर सभी की रक्षा की। शास्त्रीजी ने कहा कि जहाँ भक्त होते हैं, भगवान स्वयं कवच बनकर उनके साथ खड़े हो जाते हैं।”
कालिया दमन प्रसंग में उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने यमुना में बसे दुष्ट कालिया को पराजित कर उसके फन पर नृत्य किया और उसे धर्म के मार्ग पर चलने का आदेश दिया। यहाँ मुख्य यजमान सत्या देवी व मनीष सिंह रहे। कार्यक्रम में भूपेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, कृष्णावती देवी, राजकुमारी देवी, घरभरन पांडेय, सर्वजीत सिंह, सुशील सिंह, अनिल सिंह, ओंकार सिंह, दसई राजभर, कुंवर राजभर, सुग्रीव राजभर, रंजना देवी, प्रभा देवी, बच्ची देवी सहित सैकड़ों भक्तों ने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।




Post a Comment