श्रीकृष्ण जन्म की कथा में मिला धर्म और सत्य का संदेश
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के बजरंग नगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को कथाव्यास भागवत भूषण डाक्टर राकेश शास्त्री ने श्रीकृष्ण जन्म प्रकरण का रोचक व भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म केवल देवावतार की कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला गहन संदेश है कि अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य आता है। कंस का अत्याचार हो या कारावास का भय जब अन्याय बढ़ता है, तब धर्म और सत्य का प्रकाश स्वयं प्रकट होता है।
कथाव्यास ने बताया कि देवकी-वसुदेव का अटूट विश्वास सिखाता है कि संकटकाल में धैर्य ही मार्ग दिखाता है। कृष्ण जन्म प्रसंग यह भी संदेश देता है कि ईश्वर सदैव धर्म के पक्ष में खड़े होते हैं, अधर्म की विजय कभी स्थायी नहीं होती। वसुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को लेकर कारागार से निकलना त्याग, साहस और कर्तव्य की सर्वोत्तम मिसाल है। कथा के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया गया कि महानता जन्म से नहीं, बल्कि कर्म, नीति, ज्ञान और साहस से निर्धारित होती है। कृष्ण ने एक साधारण ग्वालबाल के रुप में रहकर भी मानवता, करुणा और संरक्षण का आदर्श स्थापित किया।
कथा में भदीड़ गांव निवासी आईपीएस अधिकारी अनिल सिंह सिसोदिया, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व चीफ प्राक्टर राघवेंद्र पांडेय, लालचंद्र तिवारी, अशोक सिंह, दशवंत यादव, अनिल राय, संजीव कुमार द्विवेदी, उमापति द्विवेदी, हरीश चंद्र दूबे, प्रभात द्विवेदी, गौरव, विष्णु, देवेंद्र तिवारी सहित अनेक स्त्री-पुरुष श्रोतागण उपस्थित रहे।





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