बंदरों-कुत्तों और बेसहारा गोवंशों के उपद्रव से क्षेत्रवासी त्रस्त
•फसल-बागवानी से लेकर कारोबार तक प्रभावित
•हमलों और सड़क हादसों में घायल हो रहे लोग
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के गांवों और बाजारों में बंदरों, आवारा कुत्तों तथा बेसहारा गोवंश का बढ़ता आतंक लोगों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गया है। बंदरों के झुंड घरों, दुकानों और खेतों में पहुंचकर सामान व फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं राहगीरों पर हमला कर उन्हें घायल भी कर रहे हैं। दूसरी ओर सड़कों पर डेरा जमाए बेसहारा गोवंश और कुत्तों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि समस्या अब महज असुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है।
ग्रामीणों के मुताबिक करहां क्षेत्र के रसूलपुर, चकजाफ़री, जमुई, घुटमा, गद्दोपुर, माहपुर, दरौरा, नगपुर, महमूदपुर आदि दर्जनभर गांवों में बंदरों के झुंड का उपद्रव लंबे समय से बढ़ता जा रहा है। बंदर राह चलते लोगों के हाथ से खाद्य सामग्री छीन लेते हैं और विरोध करने पर काटने व हमला करने से भी नहीं चूकते। बाइक की सीट तक फाड़ देने के कारण लोग उस पर ईंट रखकर वाहन खड़ा करने को मजबूर हैं। बंदरों के डर से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अकेले बाहर निकलने से कतराते हैं। वहीं सब्जी की खेती, बागवानी और खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
केस 1- पिछले एक सप्ताह के भीतर स्वामीनाथ, कुमारी छाया, छोटू सिंह, मोहम्मद शमशाद और विपुल कुमार को आक्रामक बंदरों ने काटकर घायल कर दिया। घायलों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रैबिज वैक्सीन और आवश्यकतानुसार एंटी रैबिज सीरम लगवाया जा रहा है।
केस 2- मंगलवार को आक्रामक व आवारा कुत्तों ने दरौरा, घुटमा, नईबाजार और दतौली गांवों के लक्षन, भानमती, पिंकी, विनय कुमार, बुधिया देवी और सलाउद्दीन सहित करीब आधा दर्जन लोगों को आवारा कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया।
केस 3- सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में करहां मील के पास बरहदपुर-बनियापार निवासी 38 वर्षीय रोनित गुप्ता की बाइक सड़क पर मौजूद काले गोवंश से टकरा गई थी। हादसे में वह गंभीर रुप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुए थे।
◆जानकारों का कहना है कि बरसात के दिनों में खेत-खलिहान पानी, कीचड़ और घास-फूस से भर जाते हैं, जिसके चलते कुत्ते और बेसहारा पशु बड़ी संख्या में सड़कों पर आ जाते हैं। इससे राहगीरों के साथ दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
चिकित्सकीय सलाह..
•सीएचसी मुहम्मदाबाद गोहना के वरिष्ठ चिकित्सक डा. संतोष कुमार यादव ने बताया कि इस समय एक-दो माह कुत्ते या बंदरों का निषेचन काल होता है जिससे वे ज्यादा आक्रामक होते हैं। ऐसे में थोड़ा सजग व सचेत रहना चाहिए। उनके काटने पर घाव को तत्काल साबुन और साफ पानी से कम से कम 5-10 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद चिकित्सकीय परामर्श लेकर एंटी रैबिज वैक्सीन लगवानी चाहिए। गहरे घाव अथवा चेहरे के आसपास काटने की स्थिति में चिकित्सक की सलाह से एंटी रैबिज सीरम भी जरुरी हो सकता है। उन्होंने लोगों से ऐसे जानवरों से दूरी बनाए रखने और बच्चों को विशेष रुप से सतर्क रखने की अपील की।
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आधिकारिक वर्जन...
•खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि बेसहारा गोवंश और बंदरों के बढ़ते उपद्रव को संज्ञान में लेकर संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।









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