संस्कारों की विरासत छोड़ गए बाबा हरिपाल सिंह : बालेंद्र सिंह
परिवार व समाज के प्रति समर्पण आज भी प्रेरणास्रोत
करहां (मऊ) : मऊ जिले के शमशाबाद गांव के प्रतिष्ठित नागरिक रहे स्व. ठाकुर हरिपाल सिंह का जन्म वर्ष 1911 में हुआ था। परिवार के लिए वह केवल मुखिया ही नहीं, बल्कि संस्कार, स्नेह और सामाजिक सरोकारों के प्रेरणास्रोत रहे। आजादी से पूर्व आनरेरी मजिस्ट्रेट व आजादी के बाद डिस्ट्रिक बोर्ड सदस्य के रुप में संयुक्त जनपद आजमगढ़ व संयुक्त तहसील मुहम्मदाबाद गोहना के रुप मे किए गए कार्य आज़ भी याद किए जाते है।
क्षेत्र के बड़े जमींदार होने के बावजूद उनका जीवन सादगी, सेवा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा रहा। परिवार के बच्चों को अच्छे संस्कार देने और उन्हें सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरुक करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। हरिपाल सिंह सामाजिक सद्भाव और आपसी सहयोग को विशेष महत्व देते थे। जरुरतमंदों की सहायता करना तथा परिवार और समाज के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना उनके स्वभाव में शामिल था। गांव से जुड़े लोगों के बीच भी उनकी आत्मीयता की स्मृतियां अक्षुण हैं।
पितृपक्ष में स्वजन तर्पण के माध्यम से उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। उनके पौत्र अधिवक्ता बालेंद्र सिंह बताते हैं कि दादा से मिले संस्कार आज भी जीवन में मार्गदर्शन देते हैं। पूर्वजों की स्मृतियों और उनके आदर्शों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। ठाकुर हरिपाल सिंह की संस्कारों और सेवा की विरासत आज भी परिवार के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
-बालेंद्र भूषण प्रताप सिंह, एडवोकेट सिविल कोर्ट, शमशाबाद-मऊ


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