किशोरों के साथ सकारात्मक बातचीत करें माता-पिता व शिक्षक : इंद्रजीत मौर्य
करहां (मऊ) : किशोरवय बालक-बालिकाएं प्रायः आभासी दुनियां में रहते हैं। यह संक्रमण काल की अवस्था है जिसमें माता-पिता व शिक्षकों को बच्चों से सकारात्मक बातचीत करके उनके मनोभावों को समझना चाहिये।
उक्त बातें बाबा बहाल दास इंटर कालेज करहां के प्रधानाचार्य इंद्रजीत मौर्य ने बच्चों को संस्कार व शिक्षा का महत्व बताते हुये कहीं। उन्होंने आगे बताया कि चूंकि बच्चों की नजर में उनके माता-पिता ही उनके आदर्श होते हैं। इसलिए जब वो किशोरवस्था में होते हैं, तब उनके द्वारा किए गए व्यवहार और बातों को अनुसरण करने की कोशिश करते हैं। माता-पिता जैसी बात व व्यवहार पेश करते हैं, उसके बीच अंतर होने पर किशोर मन में भ्रम पैदा होता है। माता-पिता को किशोरों के साथ सकारात्मक चर्चा करनी चाहिए, उन्हें आदर्श और व्यवहारिक बातों के संतुलन पर भी अपना पक्ष रखना चाहिए।
दरअसल आधुनिक समाज में जाति, वर्ग और रिश्तों के बारे में अपनी-अपनी मान्यतायें हैं। इसलिए अपने द्वारा कही गयी आदर्श वाली बातें और अपने व्यवहार के विषय में उन्हें समझाएं। बच्चों की नजर में आपका व्यक्तित्व आदरणीय व अनुकरणीय होता है। आदर्शों का एक बड़ा आधार हमारे वार्तालाप का तरीका है। हम जब अपने सामने वाले के साथ सम्मानजनक तरीके से बात करते हैं तो अपने आप उस पर अपना प्रभाव जमा लेते हैं। ऐसा वार्तालाप सही संस्कारों से ही संभव है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने बच्चों को सही शिक्षा व संस्कार दें। संस्कारों की पूंजी पूरे जीवन में काम आती है।
इंद्रजीत मौर्य, प्रधानाचार्य, बाबा बहाल दास इंटर कालेज करहां, मऊ।



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