संस्कृत विद्यालय का जर्जर भवन बन सकता है हादसे का कारण
करहां (मऊ) : करहां-जहानागंज मार्ग के किनारे चकजाफरी गांव में स्थित देववाणी संस्कृत विद्यालय का जर्जर भवन किसी अंजाने हादसे का कारण बन सकता है। कभी हमेशा वेद मंत्रों की ध्वनियों से गुंजायमान रहने वाला यह संस्कृत विद्यालय वर्षो से खंडहर में तब्दील हो चुका है। अब न तो यहां पढ़ाई होती है और न ही कोई अन्य अभिलेखीय कार्य। सड़क किनारे आम के पेड़ों के बीच इस जर्जर भवन के आसपास प्रायः गांव के बच्चे खेला करते हैं। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि यदि इस भवन की कोई उपयोगिता नहीं है तो जनहित में इसका ध्वस्तीकरण कर देना चाहिए अन्यथा कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
यह भवन संस्कृत विद्यालय का संस्थान है जो वर्षो से बंद पड़ा है। एक तो लोग देववाणी संस्कृत के इस संस्थान की दुर्गति से बेहद दुखी हैं वहीं दूसरी तरफ इस जर्जर भवन के कभी भी गिरने से हमेशा भयभीत भी रहते हैं। पहले यह विद्यालय बाबा घनश्याम साहब मठ गुरादरी के प्रबंधन में चलता था लेकिन अब इसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
क्षेत्रवासी संदीप सिंह, विष्णुकांत श्रीवास्तव, डाक्टर ए.के. तोमर, भूपेंद्र पांडेय, जे.पी. यादव, संत कुमार, सूर्यप्रताप, संजय तिवारी आदि ने बरसात से पहले इस जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की मांग की है। कहा है कि या तो यहां नया भवन बना दिया जाय या तो कम से कम बारिश से पहले गिरा दिया जाय। किसी अनहोनी के बाद हो-हल्ला और आरोप-प्रत्यारोप से अच्छा है कि इसे ध्वस्त कर दिया जाय।

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