त्याग और मर्यादा से होता है जीवन में आलोक : किशोरी शरण महाराज
करहां, मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के खुरहट में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा पंडाल भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा। कथावाचक किशोरी शरण महाराज के श्रीमुख से रामवन गमन की कथा से निकले वचनों ने श्रद्धालुओं के अंतर्मन को स्पर्श किया। उन्होंने कहा कि त्याग ही मनुष्य को ऊँचाई प्रदान करता है, और जब तक व्यक्ति अपने स्वार्थ और अहंकार का परित्याग नहीं करता, तब तक सच्चे धर्म का बोध संभव नहीं।
महाराजश्री ने बड़े ही मार्मिक शब्दों में कहा कि मानव जीवन सुख-दुख, लाभ-हानि, गर्मी-सर्दी जैसे अनगिनत द्वंद्वों का संगम है। किंतु जो व्यक्ति इन सबके बीच समभाव बनाए रखता है, वही सच्चे अर्थों में साधक कहलाता है। त्याग, तप और सेवा की त्रिवेणी में स्नान कर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। उन्होंने श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम ने हर परिस्थिति में धर्म और मर्यादा की पताका ऊँची रखी। उनका जीवन मानवता के लिए एक प्रकाश स्तंभ है, जो हमें कर्तव्य, संयम और समर्पण का मार्ग दिखाता है।
कथा के दौरान मुख्य रुप से में डॉ. अमित उपाध्याय, संजय यादव, सुशील, सोनू, गौरव, देवेंद्र, सुनील, दिनेश, संतोष वर्मा, सतीश, नवीन चौहान सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजकों के अनुसार यह नौ दिवसीय रामकथा 18 मार्च तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन कथा प्रवचन के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है।


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