तमसा के आंचल में समाई मासूमियत, अगले दिन मिला शव
•26 घंटे के लंबे इंतजार के बाद मिला 12 वर्षीय रेहान का पार्थिव शरीर
•परिजनों के आंसुओं से भीगा घाट, क्षेत्र में मातम का माहौल
करहां (मऊ) : कुदरत के एक बेदर्द सितम ने नगर पंचायत वलीदपुर के मोहल्ला पश्चिम की खुशियों को ताउम्र का दर्द दे दिया है। शुक्रवार की सुबह लगभग 11 बजे, जब 12 वर्ष का मासूम मोहम्मद रेहान अनजाने में लहरों से खेलने तमसा नदी के किनारे पहुंचा था, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि ये नदी उसकी जिंदगी को यूँ अपने आंचल में छिपा लेगी। नहाने के दौरान अचानक गहरे पानी के भंवर में फंसा रेहान जिंदगी की जंग हार गया और नदी के अतल प्रवाह में ओझल हो गया।
मासूम के डूबने की खबर फैलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। स्थानीय गोताखोरों ने नदी की लहरों से रेहान को वापस छीन लाने की जी-तोड़ कोशिश की, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। समय का पहिया बीतता गया और हर ढलती सांस के साथ अपनों का कलेजा मुंह को आने लगा। शुक्रवार की खामोश रात में जब निराशा के बादल छाने लगे, तब प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को इस करुण खोजबीन की जिम्मेदारी सौंपी।
रात भर जलधाराओं से जूझते हुए और करीब दो किलोमीटर दूर तक नदी का सीना छलनी करते हुए, एनडीआरएफ के जवानों ने अथक प्रयास किया। अंततः शनिवार दोपहर धरहरा घाट के समीप मासूम रेहान का निस्पंद शरीर नदी की गोद से बाहर आया। 26 लंबे और खौफनाक घंटों का यह इंतजार जब समाप्त हुआ, तो धरहरा घाट पर जुटी भीड़ की आंखें छलक उठीं। वलीदपुर चौकी प्रभारी नूरआलम और उनकी टीम पूरी मुस्तैदी व संवेदना के साथ 26 घंटों तक घटनास्थल पर डटे रहे।
जैसे ही मासूम के मिलने का संदेश गांव पहुंचा, वलीदपुर की गलियों में चीख-पुकार और कोहराम मच गया। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन तमसा की लहरों में मासूम रेहान की वह खोई हुई हंसी अब केवल अपनों की यादों और नम आंखों में ही बाकी रह गई है।


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