स्वतंत्रता संग्राम से समाजसेवा तक समर्पित रहा मेरे दादा उमराव सिंह का जीवन
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी, राजनेता व शिक्षाविद के रुप में अपने समय के युगपुरुष थे बाबू उमराव सिंह
करहां (मऊ) : पूर्वांचल की धरती ने ऐसे अनेक सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने देश की आजादी और समाज के निर्माण में अपना जीवन समर्पित कर दिया। मऊ जिले के रानीपुर गोकुलपुरा के मूल निवासी हमारे स्व. दादाजी बाबू उमराव सिंह भी उन्हीं विभूतियों में शामिल थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे उमराव सिंह आजादी के बाद घोसी लोकसभा क्षेत्र के दूसरे सांसद बने। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में पले-बढ़े उमराव सिंह नमक कानून व स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। उन्हें 6 बार जेल भी जाना पड़ा और 2 बार कारावास की सजा भी हुई। आजादी के बाद भी उनका जीवन जनसेवा को समर्पित रहा।
वे आजमगढ़ जिला परिषद के दो बार अध्यक्ष तथा जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन भी रहे। तत्कालीन समय में बिना किसी सांसद निधि के जिले की अनेक सड़कें, ब्लाक, सीएचसी, तहसील, शिक्षण संथाओं का निर्माण उनके विकास की गाथा गाते हैं। इंदिरा गांधी, पंडित कमलापति त्रिपाठी व चंद्रभानु गुप्ता के वे अत्यंत प्रिय थे और इन लोगों ने इनके विकास कार्यों में उल्लेखनीय सहयोग किया।
बाबू उमराव सिंह का सबसे महत्वपूर्ण योगदान शिक्षा के क्षेत्र में माना जाता है। उन्होंने रानीपुर में जनता इंटर कालेज व पीजी कालेज की स्थापना की और क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने का कार्य किया। इस पिछड़े इलाके में शिक्षण संस्थाओं के विकास के लिए उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा। यहां से हजारों लाखों विद्यार्थियों के जीवन में बदलाव आया। त्याग, सादगी, ईमानदारी, सामाजिक सरोकार और जनसेवा उनके व्यक्तित्व की पहचान रहे। एक जोड़ी कपड़े में पैदल साईकिल व रोडवेज से यात्रा करने वाले बाबू उमराव सिंह सादा जीवन उच्च विचार के अनुयायी रहे। 1999 में उनके निधन के बाद भी उनकी कृतियां और शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ी गई विरासत नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। पितृपक्ष में पूरे जनपद की तरफ से उनकी पुण्यस्मृतियों को नमन👏💐
◆धनंजय कुमार सिंह, प्रबंधक जनता पीजी कालेज, रानीपुर (निवासी गोकुलपुरा-मऊ)


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