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श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुन भावविभोर हुये श्रोता

श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुन भावविभोर हुये श्रोता


करहां (मऊ) : करहां में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास पंडित गया प्रसाद पाठक ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं को देवकी-वसुदेव के आठवें गर्भ का रहस्य समझाया। बताया कि किस प्रकार भगवती योगमाया व श्रीकृष्ण चंद्र का प्राकट्य हुआ और कंस को चेताने वाली आकाशवाणी की गई।


कथा विस्तार के क्रम में उन्होंने बताया कि चंद्रवंशी राजा महाराज शूरसेन के पुत्र वसुदेव थे। उनका विवाह कंस की चचेरी बहन देवकी से हुआ था। कंस बड़ी प्रसन्नता से अपनी बहन देवकी को विदा कर रहा था कि, ठीक उसी समय आकाशवाणी हुई कि इसका आठवां गर्भ तेरा काल होगा।  कंस ने यह आकाशवाणी सुनकर अपनी बहन को ही मारने के लिए तलवार निकाल लिया। वसुदेवजी ने समझाया कि राजन मृत्यु तो निश्चित है, चाहे आज हो या चाहे सौ साल बाद हो। अपनी बहन को मार कर महाराज भोज के यशस्वी वंश को कलंकित मत करो।


वसुदेव कहते हैं कि पति का कर्तव्य है कि वह हमेशा अपनी पत्नी की आन, बान, शान और प्राणों की रक्षा करे। इस परिस्थिति में उन्होंने कंस को वचन दे दिया कि आपको देवकी की संतान से भय है, देवकी से तो नहीं। इसलिए हम सारी संताने आपको दे देंगे। इस प्रकार उन्होंने कंस के कथनानुसार उसके कारागार में रहना स्वीकार कर लिया। क्रमशः देवकी के छह पुत्रो को दुष्ट कंस ने मार दिया। सातवें बलरामजी का संकर्षण करके रोहणी के गर्भ में डाल दिया गया। आठवें गर्भ के रूप में पूर्ण ब्रह्म परमात्मा और भगवती योगमाया पधारे। देवताओ ने भगवान की गर्भ स्तुति की और भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी को मध्यरात्रि में रोहणी नक्षत्र में कन्हैया का प्राकट्य हो गया।


श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुन श्रोतागण भावविभोर हो उठे और सुंदर मंगलगान और सोहर का गान कर उत्सव मनाया। इस अवसर पर मुख्य यजमान पद्मिनी व सुधीर सिंह, नीरज पांडेय, रेनू देवी, महेंद्र सिंह, शकुंतला देवी, रोशन तिवारी, सुनीता देवी, इंद्रजीत मौर्य, माला पांडेय, राधे प्रजापति, गीता देवी, राहुल सिंह, मधुबाला देवी, भूपेंद्र प्रताप, रतन सिंह, रामधनी राम, अन्नपूर्णा देवी, विनोद कुमार सहित दर्जनों श्रद्धालु उपस्थित रहे



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