प्रभु श्रीराम जन्म की कथा सुन निहाल हुए श्रोतागण
शिव जी ने पार्वती से विवाह के बाद कैलास पर आगमन किया। प्रवास के बाद माता पार्वती ने शिव जी से रामायण की कथा सुनाने का आग्रह किया। शिव जी ने कहा कि कौन सी रामायण की कथा सुनाऊं क्योंकि "रामायण शत कोटि अपारा" माताजी ने कहा कि "कहउ नाथ जो रावण मारा।" अर्थात जिस भगवान ने राम का वध किया उस राम के जन्म की कथा सुनाएं। महादेव ने कहा जब दशरथ महाराज को प्रौढ़ावस्था तक बच्चे नहीं हुए तो वह गुरु वशिष्ठ की शरण मे गए। गुरुजी ने उन्हें बताया कि भगवान से अपनी इच्छाएं नहीं मांगे बल्कि उनकी कृपा मांगे। भगवान सब अच्छा करेंगे। उन्होंने कहा "धरहु धीर होईहे सुत चारी।' लेकिन इसके लिए यज्ञ करनी होगी। गुरु वशिष्ठ ने राम भगवान को लाने के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ ध्वज फहरा दिया। इसमें बहुत से ऋषियों को आमंत्रित किया गया। "भगति सहित मुनि आहुति दीन्हीं।" यज्ञ से पसन्न अग्निदेव ने प्रकट होकर पायस प्रसाद रानियों को खाने को दिया। यज्ञ भगवान के आशीर्वाद से रानियां गर्भवती हुई। 9 महीने में भगवान प्रकट हुए।
कथा वाचक गिरी जी महाराज ने बताया कि 84 लाख योनियों में सिर्फ मनुष्य एवं देशी गाय ही नौ महीने में पैदा होती हैं और कोई नहीं। भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी दिन मंगलवार को 12 बजे दिन में हुआ। 9 तिथि को उन्होंने पूर्णांक बताते हुए इसका संबंध वेद, पुराण और शास्त्रों सहित कई महत्वपूर्ण चीजों से स्थापित किया। कथा के अंत में 'भये प्रकट कृपाल दीनदयाला' के गायन के उपरांत भगवान के जन्मोत्सव पर मंगल सोहर का गान किया गया तदुपरांत आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।
मंच पर विराजमान माँ शारदे के वरदहस्त प्राप्त पुत्र गायक रामदुलारे, नाल वादक जगदंबा प्रसाद, बैंजो पर रविन्द्र कुमार एवं मजीरे संग संगत कर रहे भीम गिरी ने सहयोग किया। इस अवसर पर महेंद्र सिंह, बृजबिहारी सिंह, आशुतोष पाण्डेय, संतीश सिंह, सुभाष सिंह, कमलेश पाण्डेय, रामजी सिंह, प्रहलाद सिंह, संतप्रकाश सिंह सिंटू, रामअवध यादव, विजय प्रताप सिंह, बृजेश यादव, दिनेश गोंड़ आदि कार्यकर्ता लोग मौजूद रहे।


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