कृष्ण से बड़ा दयालु कोई नहीं : आचार्य अनुज मिश्र
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के लग्गूपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन आचार्य अनुज मिश्रा ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने माखनचोरी, कालिया नाग नथैया, पूतना वध एवं गोवर्धन लीला की कथा सुनाई। कहा कि जिस पूतना ने भगवान को मारना चाहा या उनके मार्ग में अवरोध उत्पन किया उसे भी वासुदेव ने सद्गति प्रदान कर दी। पूतना और इंद्र इसके उदाहरण हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस जगत में कृष्ण से बड़ा दयालु कोई नहीं है। उन्होंने तो बाल व्याधिनी पूतना का भी उद्धार कर दिया। कं वा दयालुं शरणं व्रजेम्:।
आचार्य अनुज ने बताया कि पूतना बाल हत्यारिनी राक्षसी और रुधिर पीने वाली थी। वह बालकृष्ण भगवान को स्तनों में कालकूट जहर लगा कर स्तनपान कराकर मारने आई थी। उसको भी कृपालु कृष्ण ने सदगति प्रदान कर दी। पूतना के शरीर को जब जलाया गया तो उसके शरीर से सुगन्ध निकली। राजा परीक्षित ने कहा कि हे महाराज पूतना तो राक्षसी मांशभक्षी है, उसके शरीर से तो दुर्गन्ध आनी चाहिए। शुकदेवजी ने बताया कि जिसका स्तनपान स्वयं परमात्मा ने किया हो वह राक्षसी कैसे रह सकती है। इसलिए उसके शरीर से दुर्गंध की जगह अब सुगंध निकल रही है।
इस अवसर पर यज्ञाचार्य पंडित विवेक पांडेय, मुख्य यजमान सपत्निक धर्मेन्द्र प्रताप सिंह तोमर, अमरनाथ, राणाप्रताप दूबे, राजन सिंह, तेजबहादुर, चंदन पंडित, भोला, विमलेंद्र प्रताप, सूर्यभान, तारा देवी, राजबीर सहित सैकड़ों श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

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