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श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में पहुंचे प्रख्यात शांकर सन्यासी

श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में पहुंचे प्रख्यात शांकर सन्यासी

•जन्म जन्मांतर के पुण्यफल से मिलती है भागवत कथा : स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती

•हवन-पुर्णाहुति व भंडारे में उमड़े श्रद्धालु

करहां (मऊ) मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के बजरंगनगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति में शुक्रवार को जिले के नगपुर गांव की धरती में जन्म लेकर आज सम्पूर्ण विश्व को अपने ज्ञान के आलोक से देदीप्यमान करने वाले प्रख्यात शांकर सन्यासी परमहंस परिव्राकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज का आगमन हुआ। उनके पावन सानिध्य में सप्तद्वीवसीय श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति हुई एवं उनका स्वागत , अभिनंदन, वंदन किया गया। स्वामीजी ने कथा मंच से सबको मंगल आशीष प्रदान करते हुए श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के महात्म्य पर प्रकाश डाला।

स्वामीजी ने कहा कि ऋषि मेधा का प्रस्फुटन व श्रवण दुर्लभ है। भागवत कथा को सुनने के लिए देवता भी तरसते हैं। आप सभी तो बहुत पुण्यात्मा हैं, जिन्हें वैदिक संततियों के द्वारा ज्ञान, वैराग्य, भक्ति व मोक्ष प्रदान करने वाली परम पावन भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जब हमारे जन्म जन्मांतर के पुण्यफल उदित होते हैं, पूर्वजों की हमारे ऊपर अहैतुक कृपा होती है और जब आपके सत्व आपूरित होकर पूरी तरह निःसृत होते हैं, तब हमें कथा करने, कराने और सुनने का सुअवसर मिलता है।

स्वामीजी ने कहा कि भगवान कृष्ण के अतिप्रिय मार्गशीर्ष माह में कथा श्रवण की पूर्णाहुति पर वेदांत विज्ञान, ऋषिमेधा व संसार की पुरातन सनातन परंपरा के पथिक का सानिध्य आपके सत्कर्मो का प्रतिफल है। इस कुल मर्यादा के भ्रात चतुष्टय का स्नेह, तमसा का पावन तट और यहां का उर्जित कर देने वाला रजकण हम सबके सानिध्य का हेतु बना। जो आपने सप्ताहपर्यंत हर्ष, उल्लास व भक्ति से कथा श्रवण किया है उसका फल पुर्णाहुति प्रसाद में निहित है। 

बता दें कि स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती आद्य शंकराचार्य प्रज्ञा धाम गंगा घोष गाधिपुरी, श्रीमद आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थानम काशी, श्रीपीठ गोवर्धन मथुरा, श्रीकृष्ण योगमाया शक्तिपीठ अष्टभुजा व श्रीगोकुलम धाम मोतिया झील विंध्याचल के संस्थापक अध्यक्ष हैं और उन्होंने मात्र 27 वर्ष की उम्र में भारत राष्ट्र की सबसे प्राचीन परंपरा के अंतर्गत सन्यास धारण करके 1095 दिनों में हिमसेतु पर्यंत पदयात्रा की है। उनके आगमन पर कथाप्रवक्ता डाक्टर राकेश शास्त्री व हरिओम शरण महराज ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। मुख्य यजमान राधेश्याम द्विवेदी ने अपने चारों भाईयों के साथ स्वामीजी का तिलक-चंदन, माल्यापर्ण-पुष्पार्चन व अंगवस्त्र प्रदान कर आशिर्वाद प्राप्त किया। विशेष आभार प्रदर्शन टाउन इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य हरिश्चंद्र दूबे ने किया।

इस अवसर पर डाक्टर यूपी द्विवेदी, आचार्य अभिषेक पांडेय, उर्मिला देवी, रामबली यादव, रमेशचंद्र दूबे, अशीत कुमार पाठक, ज्ञानती गोंड़, संजयन त्रिपाठी, डाक्टर गोपाल सिंह, अरुणा देवी, गौरव मिश्र, संजय पाठक, आयुष कुमार, राजीव कुमार द्विवेदी, प्रभात कुमार द्विवेदी, आलोक सोनकर, संध्या देवी, संजीव कुमार द्विवेदी, पुष्पा देवी, सहित सैकडों श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। सबने पुर्णाहुति व महाआरती में भाग लेकर यज्ञ का प्रसाद व भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण किया।

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