ब्रह्म का साक्षात्कार है श्रीकृष्ण का वेणुनाद : गया प्रसाद पाठक
करहां (मऊ) : भगवान श्रीकृष्ण की वेणुनाद लीला साक्षात ब्रह्म का साक्षात्कार कराने वाली अर्थात ब्रह्मनाद लीला है। जो सभी साधक जीवात्माओं के चित्त-मन-प्राण-वृत्ति का आकर्षण करके भगवान श्रीकृष्णचन्द्र के सन्मुख ला देती है। किसी भी शरीर में जिस किसी जीवात्मा ने श्रीकृष्ण मिलन के लिए साधना किया था, उसे द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्णचन्द्र ने वेणुनाद से उन शरीरधारी जीवात्माओं का आकर्षण करके भगवान के सन्मुख ला दिया और उन्हें भगवत्प्राप्ति अर्थात ब्रह्म साक्षात्कार का परमसुख सौभाग्य प्रदान कर दिया।
उक्त उद्गार स्थानीय ब्लॉक के करहां में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथाप्रवक्ता ज्योतिषाचार्य पंडित गया प्रसाद पाठक ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि इस साधनात्मक वेणुध्वनि को भारतीय ऋषि मेधा ने सर्वभूत मनोहरम् कहा है। कृष्णदर्शन लालसा जैसे सत्य संकल्प का ऐसा अमोघ प्रताप है कि साधक किसी शरीर में जब साधना प्रारम्भ करता है तो सत्यात्मक परमात्मा स्वयं अपनी प्राप्ति का विधान बना देता है। साधना यदि कुछ शेष भी रह गई हो तो प्राणिमात्र का ईश्वर उसे स्वयं पूर्ण कर देता है। विषपान कराने वाली पूतना राक्षसी को भी जिन्होंने जननी की गति प्रदान कर दिया हो कौन ऐसा दयालु है जिसकी शरण ग्रहण किया जाय। कं वा दयालुं शरणं व्रजेम्-?
यज्ञ में आचार्य गया प्रसाद पाठक व नीरज पांडेय ने सहयोगियों संग मिलकर मुख्य यजमान रेनू देवी, सुधीर व पद्मिनी सिंह से वेदी पूजन व गोविंदाभिषेक कार्य सम्पन्न करवाया। महाआरती के उपरांत लोंगो ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर विजय सिंह, शीला देवी, अजय कुमार, सुनीता सिंह, राहुल सिंह भाई ठाकुर, अंजली, शिवाजी, रमन सिंह, गीता देवी, इंद्रजीत, मधुबाला, रामधनी प्रजापति, माला पांडेय, महेंद्र सिंह, अन्नपूर्णा देवी राधे प्रसाद, भुपेन्द्र सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।



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