करहां, मऊ। रविवार को करहां परिक्षेत्र का रसूलपुर गुरादरी स्थित संत शिरोमणि रविदास मंदिर मानो भक्ति, भाईचारे और लोकसंस्कृति के रंगों में सराबोर हो उठा। संत रविदास जयंती के पावन अवसर पर 42 गांवों से उमड़ी श्रद्धा की धाराएं जब मंदिर परिसर में आकर मिलीं, तो पूरा क्षेत्र उत्सवधर्मा बन गया।
सुबह से देर शाम तक झांकियों की कतारें, रथों की गूंज, गाजे-बाजे की स्वर लहरियां, डीजे की ताल और झंडे-पताकाओं की उड़ान हर ओर आस्था का उत्सव नजर आया। मनोहारी झांकियों ने संत रविदास के संदेशों को जीवंत कर दिया, तो जयघोष करती शोभायात्राओं ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
परंपरा के अनुरूप, सभी गांवों में सुबह से झांकियां भ्रमण करती रहीं, लेकिन सायंकाल गुरादरी का रविदास मंदिर मुख्य समारोह का केंद्र बना। यहां संतजन, समाजसेवी, विद्वान और हजारों अनुयायी एकत्र हुए। वक्ताओं ने संत रविदास के विचारों पर प्रकाश डालते हुए समाज की दशा और दिशा पर मंथन किया।
चकसहजा, करहां, घुटमा, चकजाफरी, मालव, देवरिया, राजापुर, लग्गूपुर, टेकई, भतड़ी, नगपुर, दपेहड़ी, दतौली, खरेवां, शमशाबाद, अरैला, चकभीखा, भांटी, टड़वा, जमुई सहित 42 गांवों की झांकियां हाथी-घोड़े, रथ-गाड़ियों और जयकारों के साथ मंदिर परिसर में पहुंचीं, जिससे पूरा इलाका मानो एक विशाल तीर्थ में तब्दील हो गया।
इस अवसर पर विधायक राजेंद्र कुमार, बयालिस संघ अध्यक्ष विपिन कुमार, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रवि पासी, पूर्व प्रत्याशी विक्की वर्मा, वरिष्ठ नेता डॉ. सोचन भारती, ग्राम प्रधान श्यामबिहारी जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हजारों स्त्री-पुरुषों और उत्साही युवक-युवतियों की भागीदारी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। कुल मिलाकर, गुरादरी का रविदास मंदिर उस दिन सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं रहा वह बना आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक।








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