प्रकृति संग पर्व का अभियान पहुंचा स्वयं सहायता समूहों के बीच
•महिलाओं ने फूलों की बनाईं मालाएं, किशोरियों ने तैयार किए तोरण द्वार
रमाबाई महिला संगठन रेवरीडीह भिखारीपुर की महिलाओं ने पुष्पमालाएं बनाईं, जबकि लाडली किशोरी संगठन और लाडो किशोरी संगठन भीरा की बच्चियों ने अपने हाथों से तोरण द्वार तैयार किए। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्लास्टिक और कृत्रिम सजावटी सामग्री के बजाय फूलों व पत्तियों से घर-आंगन सजाने के लिए प्रेरित किया गया। सभी ने हरित एवं प्राकृतिक दीपावली मनाने और पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनने का संकल्प लिया।
इस दौरान संगठन प्रमुख एसके पांडेय ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक सुंदरता प्रकृति से जुड़ाव और परंपराओं को सहेजने में है। फूलों और पत्तियों से बनी सजावट न केवल घरों को आकर्षक व सुगंधित बनाती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। ऐसी पहल से महिलाओं और किशोरियों में रचनात्मकता बढ़ने के साथ पारंपरिक कला को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इस अवसर पर समुदाय संदर्भ व्यक्ति अनिता, रिंकू चौहान, आशा देवी, पुष्पा, पूजा, सुशीला, सुमित्रा, साधना, अंशिका, लाडली, रिंकी, सोनम आदि उपस्थित थीं।



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