सचिवों की मांगों के समर्थन में उतरे लोग, उर्वरक आपूर्ति अभी भी बाधित
करहां (मऊ) : साधन सहकारी समितियों के सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को अब किसानों, बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों का भी समर्थन मिलने लगा है। 21 अक्टूबर से बकाया वेतन, नियमितीकरण और मानदेय भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सचिवों के समर्थन में लोगों ने शासन-प्रशासन से सकारात्मक पहल करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को पारिश्रमिक और मानदेय के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है, जो चिंताजनक है।
जिले की 93 साधन सहकारी समितियों पर तालाबंदी के चलते सहकारिता विभाग का कामकाज ठप है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। रबी फसलों, खासकर गेहूं, दलहन और तिलहन की बुआई के सीजन में डीएपी और यूरिया का वितरण बाधित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय गोदामों में पर्याप्त उर्वरक होने के बावजूद समितियों के बंद रहने से किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।
समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि सचिवों की मांगों को अनसुना करने के बजाय सरकार को उनके साथ सम्मानजनक वार्ता कर बकाया भुगतान, मानदेय और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। कर्मचारियों के परिवारों की आजीविका और भविष्य की सुरक्षा भी शासन की जिम्मेदारी है। साथ ही किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक वितरण व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि सचिवों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालकर ही सहकारिता व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।
क्या कहा लोगों ने..
•समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन यहां काम करने वाले सचिवों को कई महीनों से सेवाशुल्क नहीं मिला है। मानदेय और पारिश्रमिक के अभाव में उनके परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। अपने हक की मांग करना कोई अपराध नहीं है। शासन को हठधर्मिता छोड़कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
-हरिश्चंद्र दूबे, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, हलीमाबाद, मऊ• वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे सहकारी सचिवों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज करना उचित नहीं है। जब तक सरकार मानदेय वृद्धि और बकाया भुगतान पर ठोस लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहना स्वाभाविक है। सरकार को तत्काल वार्ता कर इस गतिरोध का समाधान निकालना चाहिए।
-रविंद्र सिंह, किसान, करहां, मऊ• मानदेय न मिलने से सचिवों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उनकी मांगें जायज हैं और सरकार को संवेदनशीलता के साथ उन पर विचार करना चाहिए। साथ ही किसानों की बुआई प्रभावित न हो, इसके लिए समितियों पर खाद वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
-संदीप दास, समाजसेवी, देवसीपुर, मऊ• सचिवों की मांगों को लंबे समय तक अनदेखा करना उचित नहीं है। बारिश के बाद खेतों में नमी का लाभ उठाकर किसान गेहूं और दलहन की बुआई करना चाहते हैं। समितियों पर तालाबंदी से उन्हें खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार को सचिवों की समस्याओं का समाधान करते हुए तत्काल उर्वरक वितरण की व्यवस्था करनी चाहिए।
-वीरेंद्र यादव, किसान, हईहासपुर, मऊ






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