गुरुवार को होगा मुकुट पूजन व शुक्रवार से शुरू होगा मंचन
करहां, मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील अंतर्गत रामलीला समिति सौसरवां-कमालुद्दीनपुर की सुप्रसिद्ध रामलीला आजादी के पहले 1945 से शुरू होकर आज तक चल रही है। 79 वर्षीय इस रामलीला के लिए इस वर्ष 19 अक्टूबर दिन गुरुवार को मुकुट पूजा होगी तथा 20 अक्टूबर शुक्रवार से विधिवत इस सुनहरे रंगमंच से रामलीला का मंचन प्रारंभ होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सौसरवां ग्राम निवासी उस समय के सुप्रसिद्ध काश्तकार स्वर्गीय रामरूप पाण्डेय ने कुछ प्रमुख सहयोगियों के साथ मिलकर सबके सहयोग से 1945 में इस स्थान पर एक भव्य रामजानकी मंदिर सहित सरोवर का निर्माण करवाया। उन्होंने मंदिर एवं सरोवर के ठीक बगल में पवित्र रामलीला शुरू करवाई। शुरुआती समय में स्वर्गीय बनवारी पाण्डेय, राजनारायण सिंह, विजयभान सिंह, सूर्यबली पाण्डेय, बेचू सिंह, श्यामनारायण सिंह आदि ने रामलीला मंचन में प्रमुख रूप से सहयोग किया। साथ ही स्वर्गीय मुसाफिर सिह, स्वर्गीय बदलू सिंह, स्वर्गीय इन्द्रदेव सिह, स्वर्गीय केशव सिंह, स्वर्गीय सभाजीत सिंह, दूधनाथ प्रजापति, नान्हक प्रजापति, विजय बहादुर सिंह स्वर्गीय विनोद पाण्डेय, दयाशंकर पाण्डेय, विजयी सिंह, सुमन कुमार पाण्डेय, कृपाशंकर पांडेय, कमलेश यादव, शारदा पांडेय, भास्कर पांडेय, बंटी पाण्डेय, कल्लू सिंह, नागेंद्र सिंह, विपुल विश्वकर्मा, आयुष यादव, आदित्य पांडेय मिंटू, बबलू सिंह, पिंटू सिंह, अनुज यादव, आदर्श विश्वकर्मा, मिंटू सिंह, ब्रह्मदेव पांडेय आदि ने भी अपने-अपने समय काल में रामलीला में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
यहां की रामलीला की प्रमुख विशेषता यह है कि यहां राम, लक्ष्मण, और सीता का अभिनय नाबालिक ब्राह्मण बालक ही करते हैं, जबकि परंपरा से हनुमान का किरदार प्रायः राजपूत सदस्यों ने ही निभाया है। यहां पुराने समय से लेकर अब तक रामलीला के अभिनय में विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र, अध्यापक, कर्मचारी, अधिकारी एवं योग्य शिक्षित लोग ही भाग लेते रहे हैं जो रामलीला के समय अपने-अपने संस्थानों से इतने दिन का अवकाश लेकर इस कार्यक्रम को सफल बनाते हैं। यहां की रामलीला के कुछ ऐसे कलाकार रहे हैं जिनकी अभिनय प्रतिभा की दाद आज भी समाज में दी जाती है। इनमें स्वर्गीय सकलदीप सिंह साधू, दिवाकर पांडेय, जनार्दन पांडेय, मुरलीधर पांडेय, बृजभूषण पांडेय, कतवारू यादव, सरयू शर्मा आदि का नाम लिया जाता है। इनके निभाए गए क्रमशः रावण, परशुराम, मेघनाथ, दशरथ, विभीषण, विदूषक एवं हास्य कलाकार के रूप में आज भी चर्चा होती है। जबकि व्यास की भूमिका में स्वर्गीय सविता पांडेय के योगदान को आज भी लोग आदरपूर्वक याद करते हैं। 1967 से 2019 तक हनुमान का अभिनय करने वाले ग्राम निवासी महेंद्र सिंह के शानदार अभिनय को लोग आज रोमांच पूर्वक चर्चा करते है। जिनका किरदार काले हनुमान के रूप में बिरला ही कहीं देखने को मिलेगा। महेंद्र सिंह ही वर्तमान में रामलीला समिति के अध्यक्ष भी हैं।
रामलीला समिति के मंत्री अशोक पांडेय ने बताया कि 19 अक्टूबर दिन गुरुवार को मुकुट पूजा होगी तथा 20 अक्टूबर को नारद मोह के साथ रामलीला का मंचन प्रारंभ हो जाएगा। यह रामलीला क्रमशः राम जन्म, ताड़का वध, धनुष यज्ञ, राम वन गमन, केवट संवाद, सूर्पनखा नककटैया, खरदूषण वध, सीता हरण, राम सुग्रीव मित्रता, बालि वध, लंका दहन आदि होगा। 26 अक्टूबर को यहां मेला लगेगा और दिन में ही रामलीला का मंचन अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ, अहिरावण एवं रावण वध के रूप में सम्पन्न होगा। जिसके अगले दिन 27 अक्टूबर को भगवान राम की राजगद्दी के साथ एक मनोहारी नाटक की प्रस्तुति के साथ सुनहरा रंगमंच अगले वर्ष तक के लिए बंद हो जायेगा।
रामलीला के वर्तमान संचालन में ग्रामप्रधान हिन्दराज कुमार, श्रीधर पांडेय, आशुतोष पांडेय, लालचंद प्रजापति, अजय पांडेय, छविनाथ प्रजापति, भूपेंद्र पांडेय, कृष्ण कन्हैया, अरुण पांडेय, राजेश, संतोष पांडेय, जगदंबा पांडेय आदि सदस्यों की प्रमुख भूमिका होगी।




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