शिव पार्वती विवाह की कथा सुन श्रोता हुए भावविभोर
द्वितीय दिवस की कथा का करहाँ के प्रख्यात चिकित्सक डॉक्टर कुँवर अनुराग सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन व व्यासपीठ का पूजन कर किया शुभारंभ
करहाँ, मु.बाद गोहना, मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के प्राचीन शिवमन्दिर देवरिया खुर्द में चल रही पंचदिवसीय श्रीराम कथा के द्वितीय दिन बुधवार रात्रि का शुभारंभ करहाँ के प्रख्यात चिकित्सक डॉक्टर कुँवर अनुराग सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन व व्यास पीठ का पूजन कर किया। उन्होंने कथा वाचक डॉक्टर सूर्यभान सिंह व पंडित ललित नारायण गिरी का माल्यार्पण कर सम्मान किया। द्वितीय दिवस की कथा में श्रोतागण डॉक्टर सूर्यभान सिंह द्वारा सीता अन्वेषण तो ललित नारायण गिरी द्वारा शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुन भावविभोर हो गए।
शिव पार्वती विवाह के बारे में कथा सुनाते हुए गिरी महाराज ने कहा कि पुराणों में विष्णु-लक्ष्मी विवाह, गणेशजी का रिद्धि-सिद्धि विवाह, राम-सीता विवाह और रुक्मणी-कृष्ण विवाह के साथ ही शिव-पार्वती के विवाह की भी विशेष चर्चा है। इस विवाह की चर्चा हर पुराण में मिलेगी। भगवान शंकर ने सबसे पहले सती से विवाह किया था। यह विवाह बड़ी कठिन परिस्थितियों में हुआ था क्योंकि सती के पिता दक्ष इस विवाह के पक्ष में नहीं थे। हालांकि उन्होंने अपने पिता ब्रह्मा के कहने पर सती का विवाह भगवान शंकर से कर दिया। राजा दक्ष द्वारा शंकरजी का अपमान करने के चलते सती माता ने यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद शिवजी घोर तपस्या में चले गए। सती ने बाद में हिमवान के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। उस दौरान तारकासुर का आतंक था। उसका वध शिवजी का पुत्र ही कर सकता था ऐसा उसे वरदान था लेकिन शिवजी तो तपस्या में लीन थे। ऐसे में देवताओं ने शिवजी का विवाह पार्वतीजी से करने के लिए एक योजना बनाई। उसके तहत कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेजा गया। कामदेव ने तपस्या तो भंग कर दी लेकिन वे खुद भस्म हो गए।
उन्होंने आगे बताया कि देवताओं के अनुरोध और माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर बाद में शिवजी ने पार्वतीजी से विवाह किया। इस विवाह में शिवजी बरात लेकर पार्वतीजी के यहां पहुंचे। कहते हैं कि शिवजी की बारात में हर तरह के लोग, गण, देवता, दानव, दैत्यादि कई थे। शिव पशुपति हैं, मतलब सभी जीवों के देवता भी हैं, तो सारे जानवर, कीड़े-मकोड़े और सारे जीव उनकी शादी में उपस्थित हुए। यहां तक कि भूत-पिशाच और विक्षिप्त लोग भी उनके विवाह में मेहमान बन कर पहुंचे। जबकि कन्या पक्ष से तमाम राजा-महाराजा, देव-ऋषिगण मौजूद रहे।
कथा की समाप्ति पर भव्य आरती की गई साथ ही पुण्य कथा प्रसाद का वितरण किया गया। संचालन लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता ने तो धन्यवाद ज्ञापन नागेन्द्र सिंह ने किया। इस अवसर पर बृजमोहन सिंह, कमलेश पाण्डेय, बृजबिहारी सिंह, आशुतोष पाण्डेय, धर्मनाथ सिंह, अरविंद सिंह, राहुल रावत, बृजेश यादव आदि मौजूद रहे।



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