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राम के धनुष तोड़ते ही सीता ने डाली वरमाला : जगदीशाचार्य

राम के धनुष तोड़ते ही सीता ने डाली वरमाला : जगदीशाचार्य

करहां (मऊ) : क्षेत्र के शमशाबाद में चल रही श्री रुद्रचंडी महायज्ञ के सातवें दिन विशेष रुद्राभिषेक अर्चन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। नौ यजमानों ने पत्नी सहित वेदी पूजन, हवन, रुद्र-चंडी पाठ में भाग लेकर रुद्राभिषेक व आरती सम्पन्न की। सायंकाल की कथा में सीता स्वयंवर की कथा सुनाई गई। बताया गया कि किस प्रकार निर्धारित शर्तों के अनुसार भगवान राम के शिव धनुष तोड़ते ही माता सीता ने करतल ध्वनि के बीच वरमाला डाली।

कथावाचक जगदीशाचार्य महाराज ने बताया कि जब शिवधनुष को प्रभु श्रीराम ने सहजता से उठाकर तोड़ दिया, तब राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता का विवाह राम के साथ तय किया। अयोध्या से राजा दशरथ सहित चारों भाइयों के विवाह हेतु बारात जनकपुर पहुंची। भव्य विवाह उत्सव में राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के पावन युगल परिणय सूत्र में बंधे।

बताया कि पूरे विवाह के दौरान जय श्रीराम और सियावर रामचंद्र की जय के जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। भक्ति संगीत, झांकी प्रदर्शन और दिव्य सजावट ने कार्यक्रम को अनुपम बना दिया। साथ ही श्रद्धालुओं ने यज्ञ प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।

इस अवसर पर यज्ञाचार्य जनार्दनाचार्य महाराज, करुणाशंकर महाराज, रामलाल शर्मा, आचार्य विद्यासागर तिवारी, उपाचार्य पंडित माधव, हरिओम मिश्रा, आशुतोष तिवारी, जितेंद्र पांडेय, आशीष, प्रभाकर शास्त्री सहित बाबूलाल, मीरा देवी, विजय नारायण सिंह, बीना सिंह, रामा सिंह, सावित्री देवी, राजेश सिंह, प्रतिमा सिंह, दयाशंकर तोमर, हेमा सिंह, विनय कुमार, कंचन देवी, अखिलेश सिंह, खुशबू सिंह, मिथिलेश सिंह, सुनीता आदि शिवभक्त उपस्थित रहे।

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