अग्निवास में अरणी मंथन से अग्नि प्रकट कर शुरु हुआ हवन
•रुद्रचंडी महायज्ञ में यजमानों ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर किया रुद्राभिषेक
•संस्कृति के लोप से समाज, राष्ट्र व धर्म तीनों का पतन : जगदीशाचार्य
करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के स्वयंभू शिव मंदिर शमशाबाद में चल रही श्री रुद्रचंडी महायज्ञ के चौथे दिन शुक्रवार से हवन-आहुति शुरु की गई। यज्ञाचार्य जनार्दनाचार्य महाराज ने पृथ्वी पर अग्निवास का मुहूर्त देखकर वैदिक ब्राह्मणों के वेद मंत्रों के बीच अरणी मंथन की क्रिया से अग्नि प्रकट कर समिधा निवेदित करवाई। सायंकाल सत्र में पार्थिव शिवलिंगों का रुद्राभिषेक कर रामकथा श्रवण की गई। इस दौरान क्षेत्रीय श्रद्धालुगण यज्ञशाला की परिक्रमा कर रहे हैं।
कथाप्रवक्ता जगदीशाचार्य महाराज ने बताया की वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति का बहुत लोप होता जा रहा है। इसकी वजह से धर्म, राष्ट्र व समाज तीनों का पतन होता जा रहा है। बताया कि यह सब कुछ तब संभव होता है, जब हम अंधानुकरण, अराजकता व आतंकवाद की ज़द में आ जाते हैं। ऐसे समय में संत चिंतन करता है और मनुष्य चिंता करता है। कहा कि जब रावण का चहुओर वर्चस्व व साम्राज्य कायम था, तब विपरीत परिस्थितियों में महर्षि विश्वामित्र ने चिंतन कर यज्ञ शुरु की। यज्ञ के फलस्वरुप रावण का परिवार सहित विनाश हुआ और रामराज्य स्थापित हुआ। इसलिए संतो की संगत व यज्ञ के आयोजन में सभी लोंगो को बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिए।
यज्ञाचार्य स्वामी जगद्गुरु जनार्दनाचार्य महाराज के नेतृत्व में आचार्य विद्यासागर तिवारी, हरिओम मिश्रा, आशुतोष तिवारी, जितेंद्र पांडेय, पंडित आशीष ने विधि-विधान से वेदी पूजन, रुद्र व चंडी पाठ सहित अग्निवास की शुभ मुहूर्त में अरणी मंथन किया। इस क्रिया से अग्नि प्रकट होते ही श्रद्धालु भक्तों ने यज्ञ भगवान का जयघोष किया। तिल, गुण, घी, जौ, अक्षत आदि सामग्रियों से समिधा बनाकर हवन किया गया। सायंकाल 11 यजमानों ने सपत्निक पार्थिव शिवलिंग का पूजन-अर्चन कर रुद्राभिषेक किया।
इस अवसर पर दयाशंकर तोमर, ऋषभ सिंह, हेमा देवी, बाबूलाल, रामा सिंह, कालिंदी देवी, राजेश सिंह, विनय कुमार, शशिकला देवी, निरहू कुमार, रामनरायन गुप्ता, इंदू देवी, डब्बू कुमार, मिथिलेश सिंह, खुशबू देवी, विजय नारायण, रामकृत शर्मा, आरती शर्मा आदि सहित सैकड़ों क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।








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