नगपुर में प्रभु श्रीराम, अंगद, बालि व जामवंत के नाम से पहचाने जाते हैं किरदार
◆40 वर्ष से लगातार चल रही है मुहम्मदाबाद गोहना के नगपुर की रामलीला
◆रामलीला का मंचन प्रारंभदशहरा को किया जाएगा रावण के पुतले का दहन
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना की आदर्श श्रीराम लीला समिति नगपुर द्वारा संचालित रामलीला में कुछ कलाकारों के किरदार के नाम से ही उनकी पहचान बन गई है। जहां प्रभु श्रीराम का लंबे समय तक अभिनय करने वाले नागेंद्र नाथ उर्फ पप्पा श्रीवास्तव को लोग आज भी राम की मर्यादा के अनुसार देखते हैं, वहीं जामवंत का किरदार अदा करने वाले किशुन चौहान राजमिस्त्री का कार्य करते है। किशुन की कद-काठी, शक्ल-सूरत, वेशभूषा धारण करने के उपरांत हुबहू जामवंत जैसी लगती है। इसी प्रकार मिठाई का परंपरागत व्यवसाय करने वाले नगपुर निवासी वीरेंद्र मद्धेशिया ने नगपुर की रामलीला में कालजयी अभिनय किया। उनका अंगद के रूप में जमाया हुआ पैर सचमुच में अधिकांश लोग नहीं उठा पाते थे। वह बालि का भी किरदार अदा करते थे।
बता दें कि नगपुर में रामलीला की भव्य परंपरा का इतिहास 40 वर्षों पुराना है। 1986 में ग्राम निवासी अरविंद कुमार त्रिपाठी, सुरेंद्र यादव, प्रभुनाथ राम, सत्येंद्र लाल श्रीवास्तव आदि ने इसकी शुरुआत की थी। अरविंद कुमार त्रिपाठी इसके पहले अध्यक्ष बने। इन लोगों ने करहां की पुरानी रामलीला के मंचन से प्रभावित होकर अपने गांव में शुरुआत की थी। सेवानिवृत्त लेखपाल प्रभुनाथ राम प्रारंभिक अवस्था से लेकर अब तक सक्रिय रूप से रामलीला आयोजन में लगातार लगे हुए हैं। प्रारंभ करने वाले लोग काफी शिक्षित, अभिनय प्रतिभा के धनी एवं प्रतिष्ठित परिवार से रहे जिन्होंने उच्च आदर्श के साथ नगपुर की इस गरिमामयी रामलीला को कई सालों तक आगे बढ़ाया।
आज भी क्षेत्रीय लोगों को पुराने पात्रों की अभिनय की याद करते हैं। शुरुआती कलाकारों में राजकुमार तिवारी, निरहू मौर्य, अरविंद कुमार त्रिपाठी, प्रभुनाथ राम, सुरेंद्र यादव, सत्येंद्र लाल श्रीवास्तव, अनिल कुमार त्रिपाठी, सुधीर लाल श्रीवास्तव, किशुन चौहान, प्रकाश मौर्या, अशोक कश्यप, त्रिलोकी नाथ श्रीवास्तव, शेषनाथ यादव, प्रकाश चौरसिया, रामकरन यादव, वीरेंद्र मद्धेशिया, रामनरेश यादव, दिनेश मौर्य, झूरी चौहान, नागेंद्र लाल श्रीवास्तव, प्रेम जायसवाल, महेंद्र यादव, अखिलेश त्रिपाठी, गोपाल जायसवाल, संतोष कुमार त्रिपाठी, राधेश्याम गुप्ता, पंकज कुमार त्रिपाठी, अजीत प्रताप, सिंह, स्वर्गीय राजेंद्र यादव, हितेंद्र त्रिपाठी, बाबूलाल यादव, शरद त्रिपाठी, महातम मौर्या, हरेंद्र यादव आदि पात्रों की अभिनय की चर्चा श्रद्धापूर्वक की जाती है।
हालांकि कुछ समय के लिए रामलीला का मंचन बंद हो गया था। इसे लखनऊ में रहने वाले गांव निवासी पंकज विधि प्रवाह के संचालक व सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता पंकज कुमार त्रिपाठी सहित अन्य सहयोगियों ने पुनः प्रयास कर शुरू करवाया। समय के साथ रामलीला ने नित्य नया कलेवर बदला और नए नियमों के क्रम में यह रामलीला प्राथमिक विद्यालय के बगल से हटकर नगपुर-महमूदपुर स्थित मुहम्मदाबाद गोहना से चिरैयाकोट मार्ग के किनारे आयोजित हो रही है।
रामलीला समिति के संचालकों ने बताया कि इस बार सोमवार को रामलीला स्थल पर भूमि पूजन, सुंदरकांड के पाठ के साथ मंच निर्माण व मुकुट पूजा की गई। मंगलवार से विधिवत रामलीला का मंचन शुरु हो कर दिया गया है। दशहरा के दिन झांकी निकलेगी एवं रावण वध सहित रावण दहन की लीला होगी।
राम के रुप में आज भी आदर्श माने जाते हैं नागेंद्र नाथ उर्फ पप्पा श्रीवास्तव
नगपुर की 40 वर्ष के रामलीला में नागेंद्र नाथ श्रीवास्तव उर्फ पप्पा श्रीवास्तव द्वारा निभाया गया राम का अभिनय आज भी यादगार है। उनका लक्ष्मण शक्ति का विलाप लोंगो को बरबस ही रोने पर विवश कर देता था। उनके जीवन पर राम के आदर्शो का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि आज भी उनकी वाणी और व्यवहार में भगवान राम की मर्यादा की झलक देखने को मिलती है। वर्तमान में वे एम.एल.एन. इंटर कालेज प्रयागराज में प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं।
अंगद व बालि के रुप में विख्यात हुए वीरेंद्र मद्धेशिया
मिठाई का परंपरागत व्यवसाय करने वाले नगपुर निवासी वीरेंद्र मद्धेशिया ने नगपुर की रामलीला में कालजयी अभिनय किया। उनका अंगद के रुप में जमाया हुआ पैर सचमुच में अधिकांश लोग नहीं उठा पाते थे। करहां में आज भी अपने पिता स्व. रामशकल मद्धेशिया द्वारा स्थापित मिठाई का प्रसिद्ध कारोबार उसी बढ़िया व्यवहार के साथ चला रहे हैं।
एकदम जामवंत की तरह दिखते हैं किशुन चौहान
वर्तमान में बड़े पैमाने पर राजमिस्त्री का कार्य करने वाले नगपुर गांव निवासी किशुन चौहान जामवंत के अभिनय में यादगार हैं। वर्तमान में यज्ञ मंडप, कथा वेदी, मठ-मंदिर, होटल, विद्यालय, गुम्बद, मीनार आदि के कुशल राजमिस्त्री के रुप में किशुन चौहान विख्यात हैं। वर्तमान में वे श्रीकृष्ण योगमाया शक्तिपीठ अष्टभुजा में सोमपुरा शैली द्वारा निर्मित मंदिर निर्माण में लगे हैं। उनकी कद-काठी, शक्ल-सूरत वेशभूषा धारण करने के उपरांत हुबहू जामवंत जैसी लगती थी। आज की वर्तमान पीढ़ी के अनेक लोग उन्हें जामवंत जी कह कर बुलाते हैं।







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