Top News

आस्था के दियों से सजता है गुरादरी धाम व पाताल गंगा सरोवर

आस्था के दियों से सजता है गुरादरी धाम व पाताल गंगा सरोवर

•सतनामी संत परंपरा का प्रसिद्ध केंद्र है मठ गुरादरी

•बाबा घनश्याम दास सहित आधा दर्जन सिद्ध संतों की हैं समाधियां

•जल संरक्षण की मिसाल बना पाताल गंगा सरोवर, नहीं सूखता है जल

•मांगी गई मंन्नते होती हैं पूरी, नहीं खाता कोई झूठी कसमें

•कार्तिक पूर्णिमा व चैत्र रामनवमी सहित वर्ष में 5 बार लगता है आस्था का मेला

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना चिरैयाकोट मार्ग पर स्थित करहां बाजार से पश्चिम तरफ चकजाफ़री गांव में स्थित मठ गुरादरी धाम आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। क्षेत्र के उत्साही नौजवानों द्वारा यहां प्रतिवर्ष दीपावाली व देव दीपावाली के दिन दीप मालिकाएं सजाई जाति हैं। घनश्याम साहब की समाधि के सामने, मठ सहित संपूर्ण पोखरे के चारों तरफ के क्षेत्र को दियों से रोशन कर अपनी आस्था प्रकट की जाती है।

बता दें कि यह सतनामी संत परंपरा की तीन सौ वर्षो पुरानी प्रसिद्ध पीठ है, जिसकी शुरुआत भुड़कुड़ा, प्रयागरी और गोविंद साहब की संत परंपरा के बाद हुई। यहां के पहले संत व महंत बाबा घनश्याम साहब की बहुत मान्यता है। मठ के ठीक सामने स्थित इन्हीं के हाथों निर्मित चमत्कारिक और पवित्र पाताल गंगा सरोवर स्थित है, जिसका पानी कभी नहीं सूखता। इस प्रकार यह जल संरक्षण की एक प्रमुख मिसाल है, जिसमें लोग स्नान व परिक्रमा कर पुण्य के भागी बनते हैं।

चकजाफ़री गांव निवासी बाबा घनश्याम साहब 300 वर्षों पूर्व बाल्यावस्था में यहां के घने जंगलों में गोचारण करते थे और बचपन से ही उन्हें वैराग्य उत्पन्न हो गया। गोविंद साहब से गुरु दीक्षा लेकर मात्र 10 वर्ष की अवस्था में इसी जंगल में निवास करने लगे और विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने यहां सूखे हुए जल स्रोत से अपनी तपस्या के बल पर जल की धारा प्रस्फुटित कर दीम तब से लेकर इस समय तक जलाशय में कभी पानी सूखता नहीं है। यहां वर्ष में कार्तिक पूर्णिमा, चैत्र रामनवमी के अलावा गोविंद दशमी, मकर संक्रांति और छठ पर्व पर भव्य मेले जैसा आस्था का जन सैलाब उमड़ता है। दूर दराज एवं आसपास के 42 गांवों के लोग यहां आकर पवित्र पातालगंगा सरोवर में डुबकी लगाते हैं और बाबा घनश्याम साहब सहित आधा दर्जन सिद्ध संतों की समाधियों पर मत्था टेकते हैं।

बाबा घनश्याम साहब की समाधि के पूरब तरफ उनके बाद के महंत व संत पदारथ साहब, महाबल साहब, प्रहलाद साहब, सत्यनारायण साहब व जगन्नाथ साहब की समाधियां स्थित है। वर्तमान में यहां के महंत मानस धुरंधर भगवान दासजी महाराज हैं। यहां क्षेत्रीय लोगों के द्वारा अपने खेतों में उपजी पहली फसलों का दान किया जाता है। यहां के लोग अपने हर मांगलिक कार्य का संपादन इसी स्थान पर करते हैं। इसके साथ ही यहां विविध धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी समय-समय पर यहां आयोजित करते हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post