भगवत कृपा के बिना मुक्ति असंभव : डाक्टर राकेश शास्त्री
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक स्थित बजरंग नगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को सायंकाल कथाव्यास भागवत भूषण डाक्टर राकेश शास्त्री ने जड़ भरत चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य मुक्ति है और यह केवल भगवत कृपा से ही प्राप्त होती है।
कथा विस्तार में उन्होंने बताया कि महाराज ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत वर्ष पड़ा, जबकि पूर्व में इसका नाम अजनाभ वर्ष था। भरत ने राजपाट त्यागकर जंगल में तप किया लेकिन एक हिरण के शावक के प्रति मोह हो जाने से साधना भंग हुई और उनके अगले जन्म में उन्हें हिरण योनि मिली।
डाक्टर शास्त्री ने कहा कि यह प्रसंग बताता है कि मोह एवं आसक्ति साधना में सबसे बड़ी बाधा हैं। भगवान की कृपा के बिना संसार से पार पाना संभव नहीं। मुख्य यजमान राधेश्याम दूबे व संध्या दूबे ने भागवत भगवान की आरती की। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता आनंद दूबे, कथावाचक हरिओम शरण महाराज, डाक्टर रविंद्र उपाध्याय, राजेंद्र चौहान, शशिकांत आतिशबाज, संजय उपाध्याय, लालचंद तिवारी, पवन सिंह, सुजय उपाध्याय, रानी राय, अलका, विभा, अंकिता, शिखा, सोनी सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष श्रोतागण उपस्थित रहे।


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