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भक्तों के अहंकार को समाप्त करते हैं भगवान : गर्गाचार्य महाराज

भक्तों के अहंकार को समाप्त करते हैं भगवान : गर्गाचार्य महाराज

•करहां के लक्ष्मी नारायण मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन

•दिन भर चला वेदी पूजन, समिधा निवेदन और यज्ञ मंडप की परिक्रमा

करहां (मऊ) : स्थानीय श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर करहां में चल रहे श्रीविष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथाव्यास पंडित राकेश शुक्ल गर्गाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने भक्तों और अन्य लोंगो की अहंकार हरण लीला का वर्णन किया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से यह सीखा जा सकता है कि विभिन्न लोंगो के साथ कैसे-कैसे संबंधों का निर्वहन कर उनका कल्याण किया जाय।

इसके पहले करहां के पूर्व जिला पंचायत प्रत्याशी महेंद्र यादव, सोसल मीडिया सनसनी राहुल मद्धेशिया व मुख्य यजमान चंद्रबाला अरुण तिवारी ने व्यासपीठ का पूजन कर कथा का शुभारंभ किया। कथा विस्तार में गर्गाचार्य महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना के लिए अपने ही मामा कंस का वध किया और रुक्मिणी के साथ विवाह कर समस्त अभिमानी राजाओं के अहंकार का विनाश किया। उन्होंने द्वारका वासियों को सुख प्रदान कर धर्म और प्रेम के आदर्श को स्थापित किया।

कथाव्यास ने भगवान की मृदभक्षण लीला का भी वर्णन करते हुए बताया कि भगवान अपने भक्तों के अहंकार को कभी टिकने नहीं देते। जैसे ब्रह्माजी, वरुण, कामदेव और इंद्र के मोह का उन्होंने समय-समय पर हरण किया। भगवान की ये लीलाएं हमें यह सिखाती हैं कि भक्त को अपने अहंकार का परित्याग कर निष्ठा और प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए, तभी उसे ईश्वर की प्राप्ति होगी।

संचालन चंद्रकांत तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन रितिक सिंह ने किया। यज्ञ मंडप में यज्ञाचार्य लालमणि चौबे व अन्य सहयोगी वैदिक ब्राह्मणों द्वारा सहयोगी यजमानों सीमा रवि सिंह, निशा अरविंद सिंह, लीलावती रमेश मौर्य, प्रमिला प्रमोद दास, मीरा संतोष चौरसिया, सोना सुरेश वर्मा, सुनीता आशीष मद्धेशिया, चंद्ररेखा महेंद्र जायसवाल, बिंदु गनेश मौर्या, आनंद, आर्यन आदि से यज्ञ कर्म संपादित कर भागवत भगवान की आरती करवाई। इस बीच उपस्थित सैकड़ो स्त्री-पुरुष श्रद्धालु कथा प्रसंग पर भावविभोर होकर झूमते नजर आए।






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