वेणुनाद ब्रह्म साक्षात्कार का साधन : स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती
करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना के सिगाड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं सहित वेणुनाद की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेणुनाद ब्रह्म साक्षात्कार का साधन है, जो साधक के चित्त और प्राण को आकृष्ट कर प्रभु के सान्निध्य तक पहुंचाता है।
स्वामीजी ने बताया कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण के वेणुनाद से गौएं, पशु-पक्षी, ऋषि-मुनि और व्रजवनिताएं सभी कृष्णमय हो गए। यमुना की धारा तक ठहर गई और समस्त ब्रज वेणुध्वनि में लीन हो गया। उन्होंने कहा कि सच्चे संकल्प और भक्ति से की गई साधना को स्वयं भगवान पूर्ण करते हैं। पूतना जैसी राक्षसी को भी प्रभु ने जननी की गति दी, जो उनकी अपार करुणा का प्रतीक है। बताया कि भगवान की शरण में जाना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है, चाहे वह जैसे भी जाय।
इस अवसर पर धनञ्जय पांडेय, आशा देवी, महेशचंद्र मिश्र, डॉक्टर प्रभात कुमार, अभिषेक आचार्य, आनंद प्रकाश द्विवेदी, गौरव मिश्र, मीरा सिंह, वैनतेय पांडेय, विनीत कुमार, शुभम तिवारी, शशांक पांडेय, आशीष तिवारी, गीता देवी, प्रियव्रत शुक्ल, नवीन उपाध्याय, शर्मिला देवी, आयुष मिश्र, मधुबाला सिंह, सत्यप्रकाश उपाध्याय, राजकुमार जायसवाल, अभिमन्यु द्विवेदी आदि सैकड़ों भक्तगण उपस्थित थे।




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