भागवत कथा में उजागर हुई द्वादशाक्षर मंत्र की अद्भुत महिमा
करहां (मऊ) : आम्रपाली वैदिक शोध संस्थान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने द्वादशाक्षर मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय की दिव्य शक्ति का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इस मंत्र की साधना साधक को सगुण ब्रह्म के साक्षात सान्निध्य तक पहुँचा देती है और भगवान स्वयं भक्त को अपने स्नेह में समेट लेते हैं।
यज्ञाचार्य डॉ. धनंजय पांडेय, महेश मिश्र व आचार्य अभिषेक ने मुख्य यजमान उर्मिला सिंह के साथ वैदिक विधि से कलश, वेदी एवं पंचांग पूजन सम्पन्न कराया। इसके उपरांत व्यासपीठ पूजन और स्वामी जी का अभिनंदन किया गया। स्वामी जी ने कथा में बताया कि चक्रवर्ती मनु तथा उनके पौत्र ध्रुव ने इसी मंत्र की साधना से भगवान नारायण के साक्षात दर्शन प्राप्त किए। बालक ध्रुव की तपश्चर्या से प्रसन्न होकर भगवान गरुण सहित मधुबन में प्रकट हुए और ध्रुव को अपनी गोद में उठा लिया।
उन्होंने आगे बताया कि ध्रुव महाराज ने मंत्र-सिद्धि के प्रभाव से दीर्घकाल तक धर्मपूर्वक शासन किया और बद्रीनाथ धाम से वैष्णवी विमान द्वारा ध्रुवलोक को प्रस्थान किया। कथा के दूसरे दिन भक्तों ने भक्ति, मंत्र-साधना और दिव्य कृपा का गहन अनुभव किया। इस अवसर पर हरिओम शरण, रामविजय सिंह, विमल मिश्र, कालिका सिंह, धीरेंद्र सिंह, जितेंद्र तिवारी, शुभम कुमार, रामशब्द सिंह, आशीष तिवारी, विनीत पांडेय, आयुष कुमार, श्यामसरण चौबे सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

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