पितृ उद्धार का श्रेष्ठ उदाहरण हैं भक्त प्रह्लाद : स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती
करहां, मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के नारायणपुरम सिगाड़ी में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पुत्र द्वारा पिता को अधोगति से बचाकर मोक्ष दिलाना अत्यंत दुर्लभ और महान कार्य है। श्रीमद्भागवत संहिता ईश्वर भक्ति के साथ-साथ पितृ भक्ति का भी अनुपम ग्रंथ है, जिसमें भक्त प्रह्लाद इसका सर्वोच्च उदाहरण हैं।
स्वामी जी ने कहा कि भक्त प्रह्लाद की सर्वत्र भगवदमयी दृष्टि से भगवान नरसिंहदेव स्तंभ से प्रकट हुए और साथ ही अधोगति प्राप्त पिता हिरण्यकश्यपु का भी कल्याण हुआ। उन्होंने बताया कि ईश्वर सत्ता सर्वव्यापी है। धरती, आकाश और पाताल का कोई भी कण भगवान से रिक्त नहीं है। भक्त जहां भी सच्चे मन से आराधना करता है- घर, वन, तीर्थ, मन या मंदिर, वहीं भगवान सगुण रूप में प्रकट होकर भक्त का मनोरथ पूर्ण करते हैं।
कथा में स्वामी जी ने बताया कि प्रह्लाद ने भगवान से यह प्रार्थना की कि भले ही उनके पिता आसुरी स्वभाव के थे, लेकिन उसी पिता से उन्हें यह शरीर प्राप्त हुआ है, इसलिए उनकी दुर्गति नहीं होनी चाहिए। भक्त की इस करुण वाणी से प्रसन्न होकर भगवान नरसिंहदेव ने प्रह्लाद को वरदान दिया कि उनके पिता सहित इक्कीस पीढ़ियों को सद्गति प्राप्त होगी। इस प्रकार भक्त प्रह्लाद ने पितृ भक्ति की अमिट मिसाल स्थापित की।
यज्ञ के मुख्य यजमान पंकज युवराज सिंह व जूही सिंह रहे। आचार्य डॉ. धनंजय पांडेय, गौरव मिश्र, अभिषेक तिवारी, आयुष मिश्र, शुभम तिवारी, विमल मिश्र, प्रियव्रत शुक्ल, विनीत पांडेय व आशीष तिवारी ने वैदिक विधि से पूजन-अर्चन कराया। सायंकालीन कथा में आशा देवी, रविभूषण प्रताप सिंह, पूनम सरोज, आशीष चौधरी, प्रमोद सिंह, अंकित सरोज, गोपाल दूबे, डॉ. शिव प्रकाश सिंह, डॉ. अमित उपाध्याय सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से भागवत भगवान की आरती कर प्रसाद ग्रहण किया और स्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।



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