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उचित देखभाल से आम के बौर बन सकते हैं भरपूर फल, किसानों को बरतनी होगी सावधानी

उचित देखभाल से आम के बौर बन सकते हैं भरपूर फल, किसानों को बरतनी होगी सावधानी

करहां (मऊ)। बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही मौसम और प्रकृति में परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देने लगा है। सर्दी का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है और गर्मी की आहट के बीच पेड़-पौधों पर नई पत्तियां, फूल और फल आने लगे हैं। फलों के राजा आम के पेड़ों पर भी इस समय सुगंधित बौर निकल आए हैं, जो वातावरण को महका रहे हैं। ऐसे समय में आम के बौरों की उचित देखभाल बेहद आवश्यक हो जाती है, ताकि वे सुरक्षित रहकर स्वस्थ फलों में परिवर्तित हो सकें और किसानों की आय में वृद्धि कर सकें।

मुहम्मदाबाद गोहना व रानीपुर ब्लाक के उद्यान प्रभारी चंद्रभान ने बताया कि आम के पेड़ों में बौर आने से पहले सिंचाई करना लाभकारी होता है। बौर निकलने के बाद आवश्यकतानुसार बोरान या इमिडा क्लोरोपिट जैसी दवाओं का छिड़काव करने से पेड़ों की स्थिति बेहतर बनी रहती है। उन्होंने बताया कि आम के पेड़ों में जितना बौर आता है, उसमें से लगभग 90 प्रतिशत बौर प्राकृतिक रूप से झड़ जाता है, जो सामान्य प्रक्रिया है। शेष बौरों को सुरक्षित रखने के लिए फल जब मटर के दाने के आकार के हो जाएं, तब कीट एवं फफूंद से बचाव के लिए आवश्यक दवाओं का छिड़काव विशेषज्ञों की सलाह से करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि फलों को कीट-रोगों से बचाने के लिए हल्की और सुरक्षित दवाओं का प्रयोग करना चाहिए, ताकि फल की गुणवत्ता बनी रहे और उसमें किसी प्रकार के हानिकारक तत्व न मिलें। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

उद्यान प्रभारी के अनुसार उद्यान विभाग आम की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करता है। बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा क्लस्टर के रूप में आम की खेती करने वाले किसानों को यदि अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है तो विभाग द्वारा उनके आम को बाहर के बाजारों में भेजने की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने किसानों से समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह लेकर बागवानी करने की अपील की है, जिससे बेहतर उत्पादन और अधिक आय सुनिश्चित हो सके।



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