सदानीरा होने की बाट जोह रही भैंसही नदी, दावों की खुली कलई
•मनरेगा के तहत हुई थी खुदाई, लगे थे पौधे
•सुखी नदी में पड़ गई दरारें, पौधे सूखे
करहां (मऊ) : कभी जनपद की जीवनरेखा मानी जाने वाली भैंसही नदी आज खुद अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। बड़े हो-हल्ला और उम्मीदों के साथ जिस नदी के जीर्णोद्धार का भूमिपूजन जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों डीएम व सीडीओ द्वारा किया गया था, वही योजना अब अधर में लटकती नजर आ रही है। सदानीरा बनाने का सपना फिलहाल कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहा है।
भैंसही नदी के कायाकल्प के लिए मनरेगा योजना के अंतर्गत व्यापक स्तर पर खुदाई कराई गई थी और नदी के दोनों किनारों पर पौधारोपण भी कराया गया। उस समय दावा किया गया था कि कुछ ही महीनों में नदी में बारहों महीने पानी बहने लगेगा और आसपास के क्षेत्रों का जलस्तर भी सुधरेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। वर्तमान स्थिति यह है कि नदी पूरी तरह जलविहीन पड़ी है। जहां पानी बहने की उम्मीद थी, वहां सूखी धरती और धूल उड़ती नजर आती है। इतना ही नहीं, नदी किनारे लगाए गए पौधे भी देखभाल के अभाव में सूख चुके हैं, जिससे योजना की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
सद्धोपुर, भतड़ी चकभतड़ी, चकसहजा, हुसैनाबाद, डड़ारी आदि तटवर्ती गांवो के ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में दिखावे के तौर पर काम तो हुआ, लेकिन बाद में न तो नियमित निगरानी हुई और न ही रखरखाव। परिणामस्वरूप करोड़ों की लागत और श्रमदान के बावजूद नदी का कायाकल्प अधूरा रह गया। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भैंसही नदी केवल नाम मात्र बनकर रह जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दिशा में कब जागता है और कब तक भैंसही नदी को सच में सदानीरा बनाने का सपना पूरा होता है।
लोंगो का क्या है कहना..
•भैंसही नदी को सदानीरा बनाने के नाम पर जो काम शुरु हुआ था, उससे हम सभी को काफी उम्मीदें थीं। शुरुआत में मजदूर लगे, खुदाई हुई, लेकिन उसके बाद सब कुछ ठप हो गया। आज हालत यह है कि नदी में पानी तो दूर, दरारें पड़ गई हैं। यह साफ तौर पर लापरवाही का नतीजा है।
-विक्की वर्मा, करहां•मनरेगा के तहत जो पौधे लगाए गए थे, उनकी देखभाल ही नहीं की गई। अगर सही तरीके से निगरानी होती तो आज यह स्थिति नहीं होती। सरकार की योजनाएं अच्छी हैं, लेकिन जमीन पर उनका सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
-अंबुज जायसवाल, अरैला•भैंसही नदी हमारे क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही है। इसके सूख जाने से जलस्तर पर भी असर पड़ा है। अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में पानी की समस्या और गंभीर हो जाएगी।
-वीरेंद्र चौहान, माहपुर•यह केवल सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण बनकर रह गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नदी का कायाकल्प अधूरा है। प्रशासन को चाहिए कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करे और इस योजना को दोबारा सही तरीके से शुरु करे।






Post a Comment