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बंदरों के उपद्रव व हमलों से त्रस्त क्षेत्रवासी, फसलें और रोजगार भी संकट में


बंदरों के उपद्रव व हमलों से त्रस्त क्षेत्रवासी, फसलें और रोजगार भी संकट में

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा व करहां परिक्षेत्र में बंदरों का बढ़ता उपद्रव अब लोगों की जान और आजीविका दोनों पर भारी पड़ने लगा है। ब्लाक परिसर से लेकर करहां क्षेत्र के दर्जनभर गांवों तक बंदरों के झुंड लगातार लोगों पर हमला कर रहे हैं। कई ग्रामीण घायल हो चुके हैं, वहीं खेतों में खड़ी खरीफ की फसल, सब्जियां, बाग-बगीचे और बाजार से लाया गया सामान भी सुरक्षित नहीं है। बंदरों के साथ आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं का बढ़ता उपद्रव भी क्षेत्रवासियों की परेशानी बढ़ा रहा है। लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की है, ताकि लोगों को इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।

क्षेत्रवासियों के अनुसार बंदर राह चलते लोगों से खाने-पीने का सामान झपट लेते हैं और विरोध करने पर हमला कर काट लेते हैं। स्थिति यह है कि ब्लाक परिसर में लोग बाइक की सीट बचाने के लिए उस पर ईंट रखकर काम निपटाने जा रहे हैं, क्योंकि बंदर सीट तक फाड़ देते हैं। अब तक कई कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण इनके हमले में घायल हो चुके हैं।

करहां गांव के शमशाद अहमद ने बताया कि हाल ही में छत पर कपड़े सुखाने के दौरान बंदर ने उन पर हमला कर गंभीर रुप से घायल कर दिया। वहीं गांव के एक अन्य युवक आनंद को भी बंदर ने काट लिया। आशीष प्रताप सिंह का कहना है कि पिछले एक दशक से बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है और रोजाना किसी न किसी को नुकसान उठाना पड़ता है।

इंद्रजीत मौर्य के अनुसार बंदरों के कारण क्षेत्र में सब्जी की खेती और बागवानी लगभग समाप्त हो गई है। किसान खेती छोड़कर दूसरे व्यवसाय अपनाने को मजबूर हैं। प्रमोद कुमार ने बताया कि उनकी मां को बंदर पांच बार काट चुके हैं और गांव की कई महिलाएं, विद्यार्थी व बुजुर्ग भी इनके हमले का शिकार हो चुके हैं। वहीं हाजी इनामुलहक अंसारी ने कहा कि बंदरों के डर से बुनकरों का ताना-बाना का काम भी प्रभावित हुआ है और कई लोग बेरोजगार हो गए हैं।

वरिष्ठ चिकित्सक डा. संतोष कुमार यादव ने सलाह दी कि बंदर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और पानी से 5-10 मिनट तक धोकर एंटीसेप्टिक लगाएं तथा बिना देर किए चिकित्सक से संपर्क कर रैबीज का टीका लगवाएं। यदि घाव गहरा हो या चेहरे के पास हो तो एंटी रैबीज सीरम भी लगवाना आवश्यक है। खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि बंदरों के बढ़ते उपद्रव का मामला संज्ञान में है। उच्चाधिकारियों और संबंधित विभाग से समन्वय कर स्थायी समाधान का प्रयास किया जाएगा।

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