नाबालिग बेटे द्वारा पिता को पिंडदान करते देख नम हुईं लोगों की आंखें
करहां (मऊ) : जालसाजी के मामले में आरोपित महिला गरिमा सिंह व उसके सहयोगियों से परेशान तथा आर्थिक तनाव के शिकार पशु चिकित्सक डा. परमात्मा सिंह (45) के निधन से बरबोझी गांव में शोक की लहर है। गोरखपुर में गुरुवार सुबह अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से गिरकर उनकी मौत के बाद शुक्रवार सुबह पैतृक गांव बरबोझी से अंतिम संस्कार के लिए शव रवाना हुआ। इस दौरान जब नाबालिग पुत्र अरिहंत ने पिता को पिंडदान किया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। स्वजन की चीख पुकार के बीच पिता को अंतिम विदाई देते समय मासूम बेटे को देख हर किसी का कलेजा भर आया।
स्वजन व ग्रामीणों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को गाजीपुर के राजघाट ले जाया गया। पूर्वाह्न 11 बजे गंगा तट पर नाबालिग पुत्र अरिहंत ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस मार्मिक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। डा. परमात्मा सिंह की पत्नी सुमित्रा सिंह भी पशु चिकित्सक हैं। उनके दो बच्चे 12 वर्षीय अरिहंत और आठ वर्षीय पड़िका उर्फ बिन्नी हैं। घटना के बाद से पत्नी, बहने, माता-पिता, बच्चों और अन्य स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
बताया गया कि डा. परमात्मा सिंह ने पांच अगस्त को गोरखपुर के एम्स थाने में गरिमा सिंह व उसके सहयोगियों के खिलाफ 1.40 करोड़ रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस इस मामले में गरिमा सिंह और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। गुरुवार सुबह डा. परमात्मा सिंह की मौत के बाद पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें गरिमा सिंह का नाम लिखा बताया गया है। गरिमा की डायरी पर लिखे पैसे के प्रति उसकी भूख और घमंड चौकाने वाला है। पुलिस सुसाइड नोट, ठगी के मुकदमे और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।


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