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मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक पुरस्कार योजना से पुरस्कृत होंगे पशुपालक : डॉ. ए.के. सिंह

मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक पुरस्कार योजना से पुरस्कृत होंगे पशुपालक : डॉ. ए.के. सिंह


करहाँ, मु.बाद गोहना, मऊ। नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत जिले के पशुपालक अब मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक पुरस्कार योजना से पुरस्कृत किये जायेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना देशी नस्ल के गोपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए पूरे राज्यभर में लागू होगी। यह जानकारी मुहम्मदाबाद गोहना के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर अमित कुमार सिंह ने दी।

शासनादेश के अनुसार इस पुरस्कार योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए डॉक्टर सिंह ने बताया कि स्वदेशी नस्ल के गायों के पालने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। पशुपालकों के देशी गायों की नश्ल सुधार, उनकी बेहतर देखभाल, गुणवत्ता युक्त पोषण एवं स्वास्थ्य प्रति रक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए उपयुक्त किसानों का चयन किया जाएगा। पशुपालकों की आय में वृद्धि करना, प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता को बढ़ाना इसके अन्य उद्देश्यों में शामिल है।

उन्होंने बताया कि इस योजना का स्वरूप इस प्रकार तय किया गया है जिसमें देशी गाय गीर, साहिवाल, हरियाणा, गंगा तेरी एवं थारपारकर के पशुपालक शामिल होंगे। इसके अंतर्गत जीवन में केवल एक बार प्रोत्साहन का लाभ किसी पशुपालक को मिलेगा। इसके तहत प्रथम, द्वितीय व तृतीय ब्यात के पशु पर ही यह योजना लागू है। प्रगतिशील पशुपालको की दो गायों के लिए केवल एक बार ही प्रोत्साहन का लाभ मिलेगा। इसके तहत पहला पुरस्कार 10000 रुपये व दूसरा पुरस्कार 15000 और प्रशस्ति पत्र सहित दिया जाएगा।

इस पुरस्कार योजना के लिए आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए जिसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो। इसके लिए आवेदन गाय के बच्चा देने की तिथि से 45 दिन के अंदर करना अनिवार्य है। यह पुरस्कार उन्नत नस्ल की स्वदेशी गाय गिर, साहीवाल, हरियाणा, गंगातिरीरी, थारपारकर के पशुपालक को देय होगा। इसमे अधिकतम दो गाय प्रति पशुपालक को प्रोत्साहन देय होगा साथ ही उस गाय के लिए जीवन काल में केवल एक बार प्रोत्साहन राशि दी जा सकती है । 

आवेदन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर ए.के. सिंह ने बताया कि इसके लिए उक्त शर्तो पर आवेदन निर्धारित प्रारूप पर किया जा सकता है। आवेदक द्वारा आवेदन पत्र के साथ कुछ स्वतः अभिप्रमाणित प्रपत्र संलग्न करना होगा। इसमें पशुपालक के आधार कार्ड की छाया प्रति, गाय की पहचान पत्र हेतु माइक्रोचिप ईयर टैगिंग अथवा पहचान के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त प्रणाली का प्रमाण पत्र लगाना होगा। इसके अलावा गाय के क्रियाशील बीमा का प्रमाणपत्र, पशुपालक के बैंक पासबुक की छाया प्रति अथवा कैंसिल चेक और गाय के साथ पशुपालक का पूर्ण फोटोग्राफ संलग्न करना है। साथ ही पशुपालक का इस आशय का नोटरी से बना हुआ शपथ पत्र की गाय को उसके जीवन काल में एक बार भी प्रोत्साहन का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है तथा गाय प्रथम / द्वितीय / तृतीय ब्यात की ही है।

आवेदन के उपरांत गाय के दुग्ध उत्पादन क्षमता का स्थलीय सत्यापन किया जाएगा जिसमें उपदुग्ध शाला विकास अधिकारी एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों, अधिकारियों द्वारा एवं पशु चिकित्सा अधिकारी एवं पशु धन प्रसार अधिकारी द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर किया जाएगा। साहीवाल, गिर, थारपारकर गाय का प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन 8 किलो से कम नही होना चाहिए। हरियाणा, गंगातिरी गाय का प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन 7 किलो से कम नही होना चाहिए। इस योजना का प्रारूप अर्थात फॉर्म राजकीय अस्पतालों पर मौजूद है। पात्र पशुपालक इस पुरस्कार योजना का लाभ उठा सकते हैं।

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