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सैकड़ों वर्षों पुरानी है गढ़वा, गुरादरी व शमशाबाद कुटी की विरासत, हो सुंदरीकरण

सैकड़ों वर्षों पुरानी है गढ़वा, गुरादरी व शमशाबाद कुटी की विरासत, हो सुंदरीकरण

करहाँ (मऊ) : देश व प्रदेश की सरकार द्वारा पुरानी धरोहरों को सहेजने, संवारने व पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मुहिम चल रही है। इसी क्रम में मऊ जिले के कई स्थान चिन्हित हुए हैं जहाँ एक करोड़ से ऊपर की सरकारी राशि द्वारा कायापलट किया जा रहा है। जैसे वनदेवी धाम, देवलास, कोठिया धाम, राजा नहुष का किला, कोपागंज व घोसी के पुराने मंदिर आदि।

मुहम्मदाबाद गोहना विकास खंड के करहाँ परिक्षेत्र में स्थित गढ़वा किला, मठ गुरादरी धाम व शमशाबाद कुटी भी सैकड़ों वर्षों पुरानी व क्षेत्र की सुप्रसिद्ध धरोहर है। समय के साथ इनके भी सुंदरीकरण की बेहद आवश्यकता है। करहाँ परिक्षेत्र के सम्मानित नागरिकों, समाजसेवियों, संतजनों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ आम लोंगो ने भी उक्त स्थानों को सहेजने व संवारने की सरकार से अपील की है।

बता दें कि माहपुर ग्रामसभा स्थित गढ़वा मौजे में स्थित किले के करीब पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए मिट्टी की खोदाई के दौरान पुरातात्विक अवशेष मिले थे। तत्कालीन जिलाधिकारी अमित कुमार बंसल के निर्देश पर आई पुरातत्व विभाग की टीम ने जांच के लिए अवशेषों को ले गई थी, परंतु तीन साल बाद भी इसके रहस्यों से पर्दा नहीं उठ सकी। बताया जाता है कि यहां कभी राजभर राजाओं का शासन चलता था। इन्ही राजाओं के किले का अवशेष गढ़वा किले के नाम से जाना जाता है। यहां प्रायः पुरानी मूर्तियां, मुहरे, बर्तन आदि के अवशेष ग्रामीणों को मिलते रहे हैं, परंतु एक अनजाने भय से इसे कोई लेता नहीं है।

इसी प्रकार बाबा घनश्याम साहब की तपस्या स्थली मठ गुरादरी धाम 350 वर्ष पुराना धार्मिक स्थल है। यहाँ पदारथ साहब, प्रहलाद साहब, महाबल साहब, सत्य नारायण साहब, जगन्नाथ साहब जैसे सिद्ध संतो की समाधियां, हनुमान, शिव व अन्नपूर्णा मंदिर तथा कभी भी न सूखने वाला पाताल गंगा सरोवर स्थित है। इस स्थान के प्रति क्षेत्रीय व दूरदराज के लोंगो की विशेष आस्था है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना समय की माँग है।

इसी प्रकार सिद्धस्थल शमशाबाद कुटी पर पुरानी सुरंगरूपी गुफा स्थित है। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील से आठ किलोमीटर दक्षिण चिरैयाकोट मार्ग के समीप शमशाबाद गांव के पूर्वी छोर पर एक सिद्ध स्थल शमशाबाद कुटिया में सुरंगरूपी गुफा आज भी मौजूद है। यहां 11 सिद्ध महात्माओं की समाधियों को दूर-दराज से लोग देखने के लिए आते हैं। यह कुटिया वर्तमान समय में साधुविहीन है। पवित्र सरोवर में छठ पूजा पर जहां श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है, वहीं प्रतिवर्ष कबड्‌डी प्रतियोगिता व मेले का आयोजन भी होता है। यहां का पवित्र सरोवर सुप्रसिद्ध संत बीरमाधव दास ने अपने हाथों से खोद कर बनाया है।

क्षेत्रीय नागरिकों ने उक्त तीनों स्थान के प्राचीन महत्व को देखते हुये पर्यटन स्थल के रुप में चिन्हित करते हुए विकसित करने की आवश्यकताओं पर बल दिया है।



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