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दो अवस्थाओं का संक्रमण काल है किशोरावस्था- दीपक

दो अवस्थाओं का संक्रमण काल है किशोरावस्था- दीपक सिंह

करहां (मऊ) : किशोरावस्था मानव जीवन में बालक व युवावस्था के बीच का एक संक्रमण काल है। इसमें अनेक शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होते हैं। जिन्हें विशेष रूप से समझ-बूझकर हमें इनके साथ अपना व्यवहार निर्धारित करना होगा। यह एक ऐसा काल है जब वह विपरीत लिंग के प्रति मन से आकर्षित होते हैं लेकिन शरीर से दूर होते हैं। ऐसे में उनके मनोभावों के अनुसार एक शिक्षक व माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उनके किशोरमन के उद्वेगों में विवेक का नियंत्रण कराना सीखाना पड़ेगा।

ज्ञातव्य हो कि किशोर प्रायः आवेगपूर्ण और तर्कहीन तरीके से काम करते हैं। साथ ही किशोर मन बहुत कोमल और चंचल होता है। इसलिए इसे बचपन और वयस्कता के बीच का संक्रमणकाल माना जाता है। किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक बदलाव तेज़ी से होते हैं और जोखिम लेने और खराब फ़ैसले लेने की आशंका बढ़ जाती है। जिसलिए किशोरों को सही समय पर शिक्षक का भावनात्मक संबल मिलना चाहिए। इन्हें तनाव व एकांत से बचाने के लिए माता-पिता का हस्तक्षेप ज़रूरी है। किशोरों को समझाते समय उनकी उलझन, दबाव और बदलते परिवेश का भी ध्यान में रखना चाहिए। साथ ही किशोरों को टोकते समय उनके व्यवहार का विश्लेषण भी करना चाहिए।

दीपक सिंह.. प्रधानाचार्य.. एम.शमीम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, माहपुर-करहां, मऊ



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