किशोरमन के मनोविज्ञान को समझें शिक्षक व अभिभावक : एम.के. पाण्डेय
करहां (मऊ) : बालकों एवं किशोरों के मनोभाव अस्थिर व चंचल होते हैं। इसलिए एक शिक्षक व अभिभावक को बालक व किशोरों के मनोविज्ञान को समझने वाला होना चाहिये। जब तक एक शिक्षक के अंदर थोड़ा-बहुत मनोविज्ञान का ज्ञान नहीं होगा तबतक वह सफल शिक्षक नहीं होगा। हमें किशोरों के मनोभाव को गहराई से समझकर उन्हें शिक्षा व संस्कार देना है।
दरअसल बाल मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की एक शाखा है जो बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास का अध्ययन करती है। यह बाल मनोविज्ञान गर्भावस्था से लेकर प्रौढ़ावस्था तक के मानसिक विकास का अध्ययन करता है। बाल व किशोर मनोभावों के मनोवैज्ञानिक, बच्चों के विकास के हर पहलू को समझने और उन्हें समर्थन देने का काम करते हैं।
किशोर व बाल मनोवैज्ञानिक, बच्चों के साथ परीक्षण और मूल्यांकन करके, उनके बौद्धिक, संज्ञानात्मक, और व्यवहारिक मुद्दों का आकलन करते हैं साथ ही मनोचिकित्सा और व्यवहार प्रबंधन जैसे हस्तक्षेपों का इस्तेमाल करते हैं।
एक शिक्षक किशोर बच्चों के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को बढ़ाने में मदद करते हैं। उनकी मानसिक ज़रूरतों, संचार मुद्दों, और व्यवहार संबंधी मुद्दों की पहचान करते हैं। साथ काम करने वाले दूसरे पेशेवरों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ भी परामर्श करते हैं। किशोरों के विकास के शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक-भावनात्मक क्षेत्रों को एक साथ देखा जाता है। इनके विकास को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय, आनुवंशिक और सांस्कृतिक कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है।
मनोज कुमार पांडेय.. प्रधानाचार्य.. जेके मेमोरियल पब्लिक स्कूल.. दरौरा-करहां, मऊ


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