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श्रीहरि के प्यारे भक्तों की कथा है भागवत : आचार्य अनुज मिश्रा

श्रीहरि के प्यारे भक्तों की कथा है भागवत : आचार्य अनुज मिश्रा

करहां (मऊ) : करहां परिक्षेत्र के लग्गूपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा प्रवक्ता आचार्य अनुज मिश्रा ने शुकदेव एवं नारद के जन्म का वृतांत सुनाया। कहा कि यह दोनों श्रीहरि विष्णु के परम लाडले हैं। बताया कि पूर्वजन्म में नारदजी एक दासी पुत्र थे। कथा सत्संग के कारण ही वह ब्रह्मा के पुत्र बन गये और तीनों लोकों में अपनी वीणा पर राग अलापते हुये भ्रमण करने लगे। कहा कि जो अपना सर्वस्व परमात्मा को अर्पण कर देते हैं, उनकी जीवनी परमात्मा से जुड़ जाती है। क्योंकि "भागवतानां चरितं यस्य सः भागवतः।।" अर्थात श्रीहरि के परम लाड़ले भक्तों का चरित्र जहां हो वहीं भागवत है।

कथा विस्तार के क्रम में आचार्य अनुज ने बताया कि राजा परीक्षित भक्त वत्सल थे, जिनका जन्म पांडव वंश में हुआ। जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया और दुर्योधन की जंघा को भीम ने अपनी गदा से तोड़ दिया। उस समय दुर्योधन अपनी अंतिम सांस ले रहा था। उसी समय उनके मित्र अश्वत्थामा आये और अंतिम इच्छा पूछने लगे। दुर्योधन ने पांडवों का सिर लाने को कहा। अश्वत्थामा रात्रि में सोते हुये पांडवों को मारने गये, परन्तु जिनके रक्षक गोविंद हों उनको कोई क्या मार सकता है।

पांडवों को लेकर भगवान चले गये और वहां द्रोपदी के पांचों पुत्र सो गये। दुष्ट अश्वत्थामा द्रोपदी के उन पुत्रों को मार दिया। इसके लिए अर्जुन ने अश्वत्थामा को पकड़ कर उसके मस्तक से मणि निकाल कर अपमानित करके छोड़ दिया। चूंकि ब्राह्मण का अपमान उसके वध के समान होता है, इसलिये अश्वत्थामा ने प्रतिशोध लेने के लिये अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र चला दिया। उत्तरा रोती हुई भगवान के पास आयीं परमात्मा ने उनके गर्भस्थ शिशु की रक्षा की और गर्भ में ही दर्शन दिये।

जब इस बालक का जन्म हुआ तो वह चारों तरफ देख रहा था कि जिसने गर्भ रक्षा की वह पुरुष कहां है। परितः इच्छतः इति सः परीक्षितः।। चारों तरफ देख रहे थे इसलिये उनका नाम परीक्षित हुआ। जब इनको सर्प के डसने से मृत्यु का श्राप हुया तो परमात्मा शुकदेवजी के रूप में उद्धार करने आये। जब शस्त्र से भय था तो सुदर्शन चक्र से उनकी रक्षा की और जब श्राप लगा तो शास्त्र के द्वारा उन्हें मोक्ष दिलाया।

कथा में मुख्य रुप से यज्ञाचार्य पंडित विवेक पांडेय, मुख्य यजमान धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर, ग्राम प्रधान बसंत कुमार, तारा देवी, प्रमोद यादव, विमलेंद्र प्रताप, दीपा सिंह,  रामपति, विपिन कुमार, राजन सिंह, रमेश सिंह आदि रहे।

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