रामकथा के हैं चार मुख्य प्रवक्ता : भूपेंद्र दासजी महाराज
करहां (मऊ) : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कथा के चार मुख्य प्रवक्ता व वार्ताकार माने जाते हैं। यह परम पावन कथा उन्ही कथाकारों की देन है, जिसे आज हम सभी सुन रहे हैं। यदि यह मुख्य वार्ताकार नहीं होते तो आज यह कथा प्रसाद हमें प्राप्त नहीं होती। इसलिए हमारे बीच रामकथा लाने वाले शिव-पार्वती, याज्ञवल्क्य-भारद्वाज, काकभुशुण्डि-गरुड़ व बाबा तुलसी के प्रति कृतज्ञ होना पड़ेगा।
यह बातें शमशाबाद में चल रही रुद्र महायज्ञ के प्रथम दिन की कथा में मानस प्रवक्ता भूपेंद्र दासजी महाराज ने कहीं। उन्होंने श्रोताओं के बीच कथा के कहने व सुनने का महत्व बताया। कहा कि सभी कथाएं प्रश्न पूछने पर कही गयी हैं। इसलिए कथा श्रवण करने वाले को प्रश्न पूछना चाहिये। बताया कि भगवान राम की कथा मुख्य रुप से शिवजी ने पार्वती को, याज्ञवल्क्यजी ने भारद्वाज को, काकभुशुण्डिजी ने गरुड़ महाराज को व बाबा तुलसीदास ने स्वयं भगवान राम को आराध्य मानकर सुनाया। एक सच्चा कथा श्रोता हनुमान की तरह होना चाहिये। आप सभी हनुमान बनेंगे तो हर जगह श्रीराम की कथा का विस्तार होगा।
इसके पहले प्रातः यज्ञ मंडप में यजमान प्रवेश, वेदी पूजन व 33 कोटि देवाताओं का आह्वान किया गया। तत्पश्चात अरणी मंथन द्वारा अग्नि उत्पन कर हवन किया गया। इस बीच अनेक स्त्री-पुरुष श्रद्धालुगण यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर रहे थे। कथा में मुख्य रुप से रामकृष्ण दासजी, सुधीरदास, नारायणदास, नारायण दास, आचार्य कपिलदेव शास्त्री, संतोष तिवारी, योगेन्द्रदास, बालक दास, आशा देवी, रामनारायण गुप्ता समेत सैकड़ों श्रोतागण मौजूद रहे।


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