Top News

चार साल बाद भी पता नहीं चली गढ़वा किले के पुरातात्विक अवशेषों की जांच रिपोर्ट

चार साल बाद भी पता नहीं चली गढ़वा किले के पुरातात्विक अवशेषों की जांच रिपोर्ट

◆मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के माहपुर गांव के गढ़वा मौजे में फैला था किला

◆चार साल पूर्व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए मिट्टी की खुदाई में मिले थे पुरातात्विक अवशेष

करहां (मऊ) : करीब चार साल पहले मुहम्मदाबाद गोहना विकास खंड के माहपुर ग्रामसभा स्थित गढ़वा मौजे में स्थिल किले के करीब पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए मिट्टी की खुदाई के दौरान पुरातात्विक अवशेष मिले थे। तत्कालीन जिलाधिकारी अमित कुमार बंसल के निर्देश पर आई पुरातत्व विभाग की टीम ने जांच के लिए अवशेषों को ले गयी, परंतु तीन साल बाद भी इसके रहस्यों से पर्दा नहीं उठ सका। हालांकि प्रशासन ने 100 मीटर की परिधि के क्षेत्र को संरक्षित घोषित करने का बोर्ड लगा दिया। अब उस क्षेत्र में न तो कोई खुदाई हो सकती है और न ही कोई स्थायी निर्माण कार्य। क्षेत्रीय नागरिकों और बुद्धजीवियों की मांग है कि पुरातत्व विभाग इतने वर्षो बाद भी आखिर किस तरह की जांच कर रहा है कि आजतक इसके समयकाल व रहस्य की जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई।

कहा जाता है कि यहां कभी राजभर राजाओं का शासन चलता था। इन्ही राजाओं के किले का अवशेष गढ़वा किले के नाम से जाना जाता है। यहां प्रायः पुरानी मूर्तियां, मोहरें, बर्तन आदि के अवशेष ग्रामीणों को मिलते रहे हैं, परंतु एक अनजाने भय से इसे कोई लेता नहीं है। जब चार वर्षों पहले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए मिट्टी की खुदाई के दौरान इस तरह के अनेक अवशेष पुनः देखे गए तो हजारों की भींड़ इकट्ठा हो गयी। तत्कालीन ग्रामप्रधान की सूचना पर उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, जिलाधिकारी समेत आला अफसर आ धमके। तुरन्त वाराणसी से पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा सेम्पल इकट्ठा किये गए। उस समय की खुदाई में मिले अवशेषों से कई तरह की चर्चाओं और दावों ने घर कर लिया। राजभर समाज इस किले पर अपना दावा तो पहले से ठोकता रहा है लेकिन खुदाई के बाद बौद्ध धर्म व मौर्य समाज के लोग भी इस किले को अपने समाज का किला बताने लगे।

सारा रहस्य पुरातत्व विभाग पर टिक गया कि आखिर ले गए अवशेषों को जांच के बाद कालक्रम और किले से संबंधित राजाओं में किसकी घोषणा करती है। लेकिन सभी लोंगो का इंतजार बस इंतजार ही रह गया। आज तक इस किले के रहस्य का पर्दाफाश पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन नहीं कर सका। यह मामला एक बार फिर तब उठा जब पिछले वर्ष माहपुर स्थित श्रीशिव-दुर्गा मंदिर के पांचवें प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव और गांव के सम्मानित नागरिक स्वर्गीय लहजू राजभर की पांचवी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में राजभर समाज के अनेक गणमान्य अतिथिगण उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने आये थे। कैलाश राजभर, राधेश्याम राजभर, सुनील राजभर, रामचंद्र राजभर, चन्द्रभान राजभर, विजय राजभर, रामजतन राजभर आदि ने उक्त कार्यक्रम के दौरान मांग किया कि शासन प्रशासन तथा संबंधित विभाग जांच की प्रक्रिया शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण कर इस किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे और इससे जुड़े संशयों को दूर कर रहस्यों की सच्चाई का पर्दाफाश करे।

Post a Comment

Previous Post Next Post