स्व. राजेन्द्र प्रसाद की श्रद्धांजलि सभा में जुटे सैकड़ों गणमान्य
मठ गुरादरी के महंत मानस धुरंधर भगवान दास ने दी ज्ञानमार्ग की सीख
सभाध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद सिंह की लिखी पुस्तक काव्यमय गीता का किया गया वितरण
करहां (मऊ) : क्षेत्र के शमशाबाद गांव के प्रतिष्ठित नागरिक व नलकूप विभाग के सेवानिवृत्त अवर अभियंता राजेंद्र प्रसाद सिंह की श्रद्धांजलि सभा में पूर्वांचल के अनेक जनपदों से सैकड़ों गणमान्यों का जमावड़ा हुआ। सबने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला एवं उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वैराग्याश्रम मठ गुरादरी धाम के वर्तमान महंत मानस धुरंधर भगवान दासजी महाराज ने इस दुखद समय में ज्ञानमार्ग अपनाने की सीख दी। कहा कि संयोग व वियोग दोनो जीवन के अटूट हिस्से हैं। अपने लोंगो का दुनियां से जाने का दुख भगवान के स्मरण व ज्ञान से दूर कर सकते हैं। इसलिए इस संसार से ह खुराक तो लेना ही है, लेकिन अपना संबंध ईश्वर से बनाए रखना ही असल ज्ञान है।
अपने उद्बोधन में यूको बैंक के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक व कविहृदय वीरेंद्र प्रसाद सिंह ने स्व. राजेंद्र सिंह को सरलता, सहजता, कर्तव्यनिष्ठता व स्वानुशासन की प्रतिमूर्ति बताया। कहा कि गीता एक जीवन उपयोगी ग्रंथ है। चूंकि यह संस्कृत में है जिसे समझने में थोड़ी कठिनाई होती है, इसलिए इस उपयोगी ग्रंथ को मैंने काव्यमय गीता के रुप में सरल व रोचक बनाने का प्रयास किया है। इस दौरान उनका लिखा ग्रंथ काव्यमय गीता का वितरण किया गया।









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