यतीम बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने वाले मौलाना लियाकत अली का इंतकाल
•नमाज़-ए-जनाज़ा में उमड़ा जनसैलाब
•माहपुर में सुपुर्द-ए-ख़ाक हुए मदरसा हेदातुल इस्लाम के संस्थापक
करहां (मऊ) : जिले में शिक्षा जगत की प्रख्यात हस्ती, यतीम बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने वाले, मदरसा हेदातुल इस्लाम के संस्थापक इमाम मौलाना लियाकत अली का मंगलवार की आधी रात इंतकाल हो गया। कुछ दिनों की बीमारी के कारण उन्होंने 75 वर्ष की उम्र में दुनियां को अलविदा कह दिया। बुधवार अपराह्न 3 बजे करहां क्षेत्र के अपने पैतृक गांव माहपुर में उनका जनाजे की नमाज़ अता की गई। जिसमें जिले भर से उनके चाहने वालों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
बता दें कि मौलाना लियाकत अली माहपुर स्थित जामा मस्जिद के इमाम और मदरसा हेदातुल इस्लाम के संस्थापक थे। इनके संरक्षण में सैकड़ों गरीब व यतीम बच्चे निश्शुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे। शांत स्वभाव के मौलाना लियाकत अली अपनी तकरीर और दुआओं में हमेशा हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और देश में शांति की कामना करते थे। पूर्वांचल व उत्तर प्रदेश में उन्हें अक्सर जलसों में आमंत्रित किया जाता था। वहां वे लोगों को सही राह पर चलने और गरीबों की मदद करने का संदेश देते थे। वे कोपागंज व दारुल उलूम में भी लंबे समय तक शिक्षा व दीनी जगत से जुड़े रहे।
उनकी आखिरी जियारत के लिए क्षेत्र के माहपुर स्थित एम. शमीम मेमोरियल पब्लिक स्कूल का विशाल मैदान चुना गया, जो लोंगो की भीड़ के कारण बौना साबित हो गया। मस्जिद के सामने मैदान में जनाजे की नमाज अदा की गयी, जिसमें हज़ारो लोग शरीक हुए। हर कोई उनके जनाजे को कंधा देने के लिए परेशान था।
उनका अंतिम दर्शन करने वालों में विधायक राजेंद्र कुमार, मुफ़्ती जावेद अख्तर, महेंद्र यादव, डाक्टर रिजवान उल्लाह सिद्दीकी, पूर्व विधायक बैजनाथ पासवान, रामदरश यादव, मौलाना इनामुलहक, रवींद्र यादव, डाक्टर इफ्तेखार अहमद, श्याम बिहारी जायसवाल, आरिफ खां, शहंशाह सौदागर समेत कई इस्लामिक और राजनैतिक हस्तियां शरीक हुईं।



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