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आत्मदेव, धुंधकारी व गोकर्ण के प्रसंग से भावविभोर हुए श्रोता

आत्मदेव, धुंधकारी व गोकर्ण के प्रसंग से भावविभोर हुए श्रोता

•करहां के लक्ष्मी-नारायण मंदिर पर श्रीविष्णु महायज्ञ व भागवत कथा का दूसरा दिन

•श्रद्धालुओं ने डाली आहुति की परिक्रमा, महाप्रधान प्रत्याशी व ग्रामप्रधान ने किया व्यासपीठ का पूजन

करहां (मऊ) : स्थानीय करहां गांव स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर क्षीरसागर पर चल रही श्रीविष्णु महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालु यजमानों ने वेदी पूजन, हवन आदि में भाग लिया और मंडप की परिक्रमा लगाई। सायंकाल  कथा में आचार्य पंडित राकेश शुक्ल गर्गाचार्य महाराज ने आत्मदेव, धुंधकारी व गोकर्ण के प्रसंग के साथ बताया कि कर्म और भाग्य एक दूसरे पर निर्भर हैं। जैसा हम कर्मफल संचित करेंगे वैसे ही हमारे भाग्यफल का निर्धारण होगा।

इसके पूर्व करहां महाप्रधान पद के प्रत्याशी विक्की वर्मा ने व्यासपीठ का पूजन कर कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने कथावाचक गर्गाचार्य महाराज का माल्यापर्ण कर स्वागत किया। आगे कथा में गर्गाचार्य महाराज ने बताया कि दक्षिण भारत के तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नामक एक व्यक्ति रहते थे, जिनकी पत्नी का नाम धुंधली था। पत्नी व्यवहार से ठीक नहीं थीं और उन्हें कोइ संतान भी नहीं थी। निःसंतानता के संताप से दुखी आत्मदेव प्राण त्यागने जा रहे थे कि उन्हें एक सन्यासी ने रोका और इसके निवारण के लिए एक फल प्रसाद दिया। बताया कि पत्नी को खिलाने से संतान उत्पन्न होगा। आत्मदेव की पत्नी ने दुर्व्यवहार स्वरुप वह फल न खाकर गाय को खिला दी और कुछ महीनों पश्चात अपनी बहन के नवजात बच्चे को अपना बच्चा बता कर पालन-पोषण किया औऱ उसे अपना बना लिया।

कालांतर में धुंधली का यही बालक धुंधकारी और गाय से उत्पन्न मनुष्यरुपी बालक गोकर्ण के नाम से विख्यात हुए। गोकर्ण धर्मात्मा निकला, जबकि धुंधकारी गलत आचरण के कारण वेश्याओं के जलाने से प्रेतयोनि में चला गया। बाद में चलकर गोकर्ण द्वारा सुनाई गई भागवत कथा से ही धुंधकारी को प्रेतयोनि से छुटकारा मिला। गर्गाचार्य महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से हमारे जन्मजन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और भक्त को भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त हो जाती है क्योंकि यह कथा मनुष्य और प्रेत योनि दोनो को तारने वाली होती है।

कथा के बाद मुख्य यजमान अरुण चंद्रबाला तिवारी, विष्णुकांत लक्ष्मी श्रीवास्तव, अनिल रिंकी पटवा, सानंद गुंजा गुप्ता, श्रीकांत किशोरी चौरसिया, मनोज गुंजन मद्धेशिया, ऋषि किरन वर्मा, दीपक कुमकुम गुप्ता, रविप्रकाश सोनम मौर्य आदि ने भागवत भगवान की आरती उतारी। इस अवसर पर सैकड़ों स्त्री-पुरुष, वृद्ध-बालक, उत्साही युवक उपस्थित रहे।

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