धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र संग्राम का अमृत फल है श्रीमद्भगवद्गीता : स्वामी ज्ञानानंद
करहां (मऊ) : जब कुरुक्षेत्र के महान संग्राम में अर्जुन ने अपनी देह, इंद्रियों और मन रुपी रथ को पूर्ण भाव से भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया, तब कृपालु श्रीकृष्ण स्वयं उसके मेधा रुपी सारथी बन गए। इसके परिणामस्वरूप उस पुण्य आत्मा को हर क्षण प्रकृति, जीव-जगत और जीवन के संघर्षों के बीच ईश्वर के अविनाशी बोध का दिव्य प्रकाश स्वयं प्रकट होने लगता है। तभी मनुष्य का व्यामोह दूर होकर वह खुली आंखों और खुले मन से भगवान के दुर्लभ दर्शन और श्रीमुख श्रवण का सौभाग्य प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि सनातन वैदिक धर्म में परमात्मा का सनातनी नाद वायु और आकाश में निरंतर गूंजता है। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र का सबसे पावन और अमृत तुल्य फल श्रीमद्भगवद्गीता है। यह एक जीवन उपयोगी ग्रंथ है, जिसकी दिव्य वाणी भगवान श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष मास की मोक्षदा एकादशी को अर्जुन को सुनाई थी। उन्होंने सभी को गीता जयंती की शुभकामनाएं और मंगल आशीष दिया।
उक्त विचार श्रीमद आद्यजगद्गुरु शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थानम काशी के संस्थापक अध्यक्ष परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने व्यक्त किए। वे गीता जयंती की पूर्व संध्या पर आम्रपाली वैदिक शोध संस्थान, बकवल में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सोमवार को यहां भव्य गीता जयंती महोत्सव मनाया जाएगा तथा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ होगा, जो एक सप्ताह तक चलेगी। सोमवार की सुबह कथा यज्ञ के लिए भव्य कलश यात्रा भी निकाली जाएगी।
आगे स्वामीजी ने श्रद्धालुओं को बताया कि जिस दिव्य स्वरूप, दर्शन और योग श्रवण का सौभाग्य मनुष्य को प्राप्त होता है, उसके लिए देवता भी तरसते हैं। देवताओं के रोम-रोम में इस दर्शन की नित्य आकांक्षा रहती है। सुदुर्दर्शमिदं रूपं… देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शन काङ्क्षिणः। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित अविनाशी योग, दर्शन और श्रवण को जो मनुष्य आलस्य त्यागकर विभिन्न माध्यमों से समाज में फैलाता है, वह भगवान के लिए ज्ञानयज्ञ के समान पूजा करने वाला होता है। पृथ्वी पर उससे बढ़कर भगवान का प्रिय कार्य करने वाला कोई दूसरा नहीं है। न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तम, भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि।
इस अवसर पर उर्मिला सिंह, आचार्य अभिषेक, डाक्टर रामशब्द सिंह, गौरव मिश्र, जिंतेंद्र तिवारी, विनोद प्रताप, आयुष कुमार, विनीत पांडेय, बालेंद्र सिंह, मनोज राजभर, अशीत पाठक, आदि उपस्थित रहे।

Post a Comment