भागवत कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन
करहां (मऊ): मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के बजरंगनगर हलीमाबाद में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास भागवत भूषण डाक्टर राकेश शास्त्री ने मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण की विविध बाल लीलाओं का रसपूर्ण और हृदयस्पर्शी वर्णन किया। श्रोतागण दिव्य प्रसंगों में इस कदर तल्लीन रहे कि पूरा पंडाल कृष्णमय हो उठा।
कथाव्यास ने सबसे पहले पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार बालकृष्ण ने मां के रुप में आई राक्षसी पूतना को मुक्ति प्रदान की। इसके बाद श्रीकृष्ण द्वारा तृणावर्त संकटासुर वध की कथा सुनाई, जिसमें बाल रुप में ही भगवान ने गोपों के जीवन पर आए संकटों का निवारण किया। इसके पश्चात उन्होंने मृदभक्षण लीला का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब यशोदा मैया ने कृष्ण से मिट्टी खाने की शिकायत पर उनका मुख खुलवाया, तो उन्होंने ब्रह्मांड के अनंत रूपों का दर्शन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिभाव से भर उठा।
कथा के अगले चरण में कालिय नाग नथैया का रोचक वर्णन हुआ। डाक्टर शास्त्री ने बताया कि किस प्रकार नन्हे कृष्ण ने यमुना को विषैले कालिय नाग से मुक्त कर गोप-गोपियों और वृंदावन-वासियों को भय से छुटकारा दिलाया। इसके साथ ही उन्होंने गोवर्धन लीला का प्रेरक प्रसंग सुनाया, जिसमें श्रीकृष्ण ने इंद्र के कोप से गोकुलवासियों की रक्षा हेतु पूरे गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा पर उठा लिया। यह प्रसंग सुनते ही उपस्थित भक्तों ने गोवर्धनधारी गिरिधारी लाल की जय के जयघोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
अंत में कथाव्यास ने महारास का दिव्य और अद्भुत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महारास केवल नृत्य नहीं, बल्कि परमात्मा और जीवात्मा के मिलन का प्रतीक है, जिसमें भक्त और भगवान दोनों एकाकार हो जाते हैं। इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम दूबे, संध्या दूबे, रामकुमार तिवारीजी महाराज, डा प्रवीण मद्धेशिया, डा मोनिका गुप्ता, सुयश पांडेय, पंकज सिंह, बिरजू कन्नौजिया, परमी यादव, डाक्टर धर्म सिंह गौतम, गोपाल सिंह, श्याम चौबे आदि सैकड़ों स्त्री पुरुष श्रोतागण उपस्थित रहे।


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