विराट हिंदू सम्मेलन में समाज की एकता बढ़ाने व भेदभाव मिटाने का मिला संदेश
•बीएसआरके इंटर कालेज रामनगर ख़ालिसा में हुआ भव्य आयोजन
•हिंदुओं को जाति-वर्ग, धनी-गरीब का भेद होगा मिटाना : हरिओम महाराज
करहां (मऊ) : संगठित हिंदू व समर्थ भारत के उद्देश्य से हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के तत्वावधान में सोमवार को बी.एस.आर.के. इंटर कालेज, रामनगर खालिसा मोड़ पर एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने हिंदू समाज की बंधुता, परस्पर प्रेम, सहयोग, स्वाभिमान बढ़ाने तथा भेदभाव मिटाने का सशक्त संदेश दिया। इस अवसर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोंगो को जागरुक किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण संयोजक गोपाल आर्या, विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कथावाचक पंडित हरिओम शरण महाराज व समाजसेविका सुनीता सिंह ने मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। सम्मेलन की अध्यक्षता शिव मंदिर वलीदपुर के पुजारी शिवजोर राम साधुजी व संचालन खंड के बौद्धिक प्रमुख सुधाकर राय ने किया। विद्यालय के प्रबंधक प्रवीण राय ने अंगवस्त्र व स्मृतिचिह्न प्रदान कर आगत गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम में पधारने हेतु सबको धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्य अतिथि गोपाल आर्या ने कहा कि हिंदू समाज को आज एकत्र होने की आवश्यकता है। हमारा देश पहले सोने की चिड़िया और विश्व गुरु कहा जाता था। आज के परिवेश में हिंदू समाज एकत्र होकर उस दिशा में चलकर भारत माता को परम वैभव पर पहुंचा सकता है। विशिष्ट अतिथि हरिओम शरण महाराज रामायणीजी ने भक्त और भगवान के बीच में माता शबरी का उदाहरण देकर बताया कि भगवान ने अनेक ऐसे लोगों को गले लगाया जिनको समाज ने बहिष्कृत कर दिया। इसलिए हिंदू समाज को एकत्र व संगठित करने के लिए हमें भी भेदभाव छोड़ना होगा। विशिष्ट अतिथि सुनीता सिंह ने मात्रृशक्तियों को इंगित करते हुए कहा कि जिस घर व देश में नारी की पूजा होती है, वहां भगवान का निवास होता है। इसलिए हम सभी को स्त्री का सम्मान अवश्य करना चाहिए।
इस अवसर पर खंड के संघ चालक जनार्दन राय एडवोकेट व संतोष सिंह पटेल, खंड कार्यवाह धर्मेंद्र सिंह, सह जिला संपर्क प्रमुख आशीष राय, सह जिला सेवा प्रमुख तेजनाथ मौर्य, सह जिला सेवा प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद, विद्यालय के प्रधानाचार्य रजनीश कुमार राय सहित सैकड़ों स्त्री-पुरुष व युवक-युवतियां उपस्थित रहे।








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