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भागवत कथा में श्रीकृष्ण योगमाया के समकालीन अवतरण का हुआ वर्णन

भागवत कथा में श्रीकृष्ण योगमाया के समकालीन अवतरण का हुआ वर्णन

एक ही क्षण में प्रकट हुई दोनों दिव्य शक्तियाँ- स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती

करहां (मऊ) : आम्रपाली वैदिक शोध संस्थान बकवल में गीता जयंती महोत्सव के अंतर्गत चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और भगवती योगमाया के एक साथ हुए दिव्य अवतरण का संक्षिप्त किंतु मनोमुग्धकारी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भाद्र कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में कंस कारागार में श्रीकृष्ण और उसी क्षण नंदग्राम में योगमाया ने अवतार लेकर पृथ्वी पर दिव्य लीला प्रारंभ की।

स्वामीजी ने कहा कि जन्माष्टमी उत्सव केवल कृष्ण जन्म ही नहीं, बल्कि योगमाया सहित दोनों का संयुक्त प्राकट्य पर्व है। उन्होंने वासुदेव द्वारा शेषनाग की छाया में श्रीकृष्ण को गोकुल पहुँचाने तथा योगमाया के कंस को उपदेश देकर देवराज इंद्र के रथ से विंध्याचल पर्वत पहुँचने की कथा भी सुनाई। योगमाया यहीं विंध्यवासिनी रूप से विख्यात होकर आज भी भक्तों के कष्टों का निवारण करती हैं।

इससे पूर्व यज्ञाचार्य डॉ. धनंजय पांडेय और सहयोगी आचार्यों ने मुख्य यजमान उर्मिला सिंह द्वारा वेदी पूजन, परायण व आरती कराई। कथा में हरिओम शरण, आचार्य महेश चंद्र, धीरेंद्र सिंह, अभिषेक कुमार, संतोष द्विवेदी, विमल मिश्र, रामविजय सिंह, विनीत पांडेय, मधुरिमा, शुभम कुमार, श्वेता सिंह, दृष्टि सिंह, निर्मला सिंह, प्रज्ञा सिंह, प्रियंका सिंह सहित बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।

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