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भगवान जोड़ने आते हैं, तोड़ने नहीं; श्रीराम कथा में गूंजा एकता और राम नाम का संदेश

भगवान जोड़ने आते हैं, तोड़ने नहीं; श्रीराम कथा में गूंजा एकता और राम नाम का संदेश

करहां (मऊ) : मुहम्मदाबाद गोहना कस्बे से सटे बरहदपुर स्थित किशुनदास बाबा की कुटी पर चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को सायंकाल कथा पंडाल में भक्ति और ज्ञान का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा के दौरान विंध्याचल से पधारे पंडित धर्मराज शास्त्री महाराज एवं बाल व्यास सम्पूर्णानंद महाराज ने श्रीराम के आदर्शों और राम नाम की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला।

पंडित धर्मराज शास्त्री महाराज ने कहा कि भगवान इस संसार में जोड़ने के लिए अवतार लेते हैं, तोड़ने के लिए नहीं। उन्होंने वाल्मीकि रामायण का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रीराम के अवतार से पूर्व महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र हजारों वर्षों तक संघर्षरत रहे, वहीं अयोध्या नरेश दशरथ और मिथिला नरेश जनक के बीच भी सीमा विवाद था। भगवान श्रीराम ने एक के यहां अवतार लेकर और दूसरे के यहां विवाह कर दोनों को जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन समरसता, प्रेम और एकता का संदेश देता है।

वहीं बाल व्यास सम्पूर्णानंद महाराज ने कहा कि राम से भी बड़ा राम का नाम है। उन्होंने श्रीराम नाम की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि राम नाम के जप से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। इसी राम नाम के प्रभाव से हनुमान जी महाराज ने सौ योजन समुद्र को पार किया। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ राम नाम का जप किया जाए तो भवसागर से भी पार उतरा जा सकता है।

कथा के दौरान पंडित धर्मराज शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की मंगलमय कथा सुनाई, जबकि आजमगढ़ से पधारे पंडित सुरेशानंद महाराज ने सती मोह की कथा को आध्यात्मिक भाव के साथ प्रस्तुत किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और श्रीराम नाम के स्मरण में लीन होकर भक्ति रस का आनंद लिया।



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