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बसंत की बयार में गूंजा शौर्य का इतिहास

बसंत की बयार में गूंजा शौर्य का इतिहास

वीर शिरोमणि महाराजा सुहेलदेव की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न

मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ। बसंत पंचमी की सुनहरी धूप, सरसों के पीले फूल और वीणा की मधुर तान के बीच शुक्रवार को स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र के ख़ालिसा गांव की धरती एक बार फिर इतिहास के गौरवशाली पन्नों से सजी नजर आई। इसी पावन अवसर पर वीर शिरोमणि महाराजा सुहेलदेव की जन्म जयंती पूरे श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रीय चेतना के साथ मनाई गई।

स्मारक स्थल पर स्थापित महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा पर अनुयायियों, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उस महान योद्धा को नमन किया, जिनका जीवन शौर्य, त्याग और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल रहा। वातावरण “जय महाराजा सुहेलदेव” के जयघोष से गूंज उठा और हर चेहरे पर गौरव की झलक दिखाई दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के जिला प्रतिनिधि एवं मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व मंडल अध्यक्ष रामसरन चौहान ने अपने ओजस्वी संबोधन में महाराजा सुहेलदेव को राष्ट्र की अस्मिता का प्रहरी और पराक्रम का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि माघ मास की बसंत पंचमी, सन 990 ईस्वी को बहराइच में महाराजा प्रसेनजित के घर जन्मे सुहेलदेव ऐसे युगपुरुष थे, जिनके रहते किसी भी विदेशी आक्रांता ने भारत की ओर आंख उठाने का साहस नहीं किया।

मुख्य अतिथि ने आगे कहा कि महाराजा सुहेलदेव ने 21 राजाओं को एक सूत्र में पिरोकर विदेशी शासकों के विरुद्ध संगठित संघर्ष का शंखनाद किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि जब राष्ट्रहित सर्वोपरि हो, तो एकता ही सबसे बड़ा शस्त्र बन जाती है। उनकी तिथिवार जयंती पर आज हम सभी राष्ट्र की ओर से उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महाराजा सुहेलदेव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रेरणा है। इस अवसर पर प्रद्युम्न प्रताप, हरिराम बरनवाल, संजय राजभर, विनोद राजभर, शिवकुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, युवा एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। बसंत पंचमी का यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह रहा, बल्कि इतिहास से जुड़कर राष्ट्रप्रेम को आत्मसात करने का एक सजीव अवसर भी बन गया।

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